कोयलांचल बेरमो में काला कोयले का काला सच आया सामने
हिसंक झडप
0 अजय अश्क
बोकारो। सेन्ट्रल कोलफील्डस लिमिटेड के खदानों और रेलवे रैक से चुराया गया कोयला, अवैध डंपिंग और कोयले के बंटवारे को लेकर उत्पन्न विवाद तथा कोयला माफिया द्वारा चोरी के कोयले की अवैध तरीके से हडबडी में ट्रांसपोर्टिग के प्रयास ने ऐसा विवाद बढ़ाया की कोयले के अवैध कारोबर से जुडे़ दो गुटों मंें हिसंक झडप हुई और एक महिला की मौत हो गयी। इसी के साथ कोयलांचल बेरमो में कोयले के बेरोकटोक चल रहे अवैध धंधा का सच बाहर निकल कर सामने आ गया। यह घटना पांच नंबर धौड़ा की बतायी गयी है और इस घटना से पांच नंबर धौडा जो कहने को तो मजदूरों की बस्ती है, पर वहां का सच भी सामने आ गया है की किस बडे़ पैमाने पर सीसीएल के खदानों से रेलवे रैक से काले हीरे को उतार कर, चुराकर अवैध तरीके से उसे ढोया जा रहा है और पांच नंबर धौडा में बने अवैध डिपों में डंप किए गए कोयले के बडे भंडार को कोयला माफिया बटोर कर या तो अपने अवैध डिपो में पहुंचा रहे हैं या फिर वहीं से उठाकर सीधे डिस्टनेंसन तक भेज रहे हैं। जिस महिला की मौत हुई है वह चार महीने की गर्भवती थी। विवाद कैसे पैदा हुआ तो साफ कर दिया गया की मामले में कोयला की भूमिका है।
हां तो कोयलाचंल बेरमो मे फैले आर्थिक अपराधियों और कोल माफिया का तंत्र किस तरह से कोयले का अवैध कारेाबार कर रहा है और इस घटना के बाद मामले को, तूल ना पकडे इसका पूरा ख्याल रखते हुए किस तरह से आनन फानन में शव को देर रात में ही पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने में तत्परता दिखायी और फिर अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल किया वह समझा जा सकता है। जो थाना में शिकायत दी गयी है, उसमें कई लोगो को इस हत्याकांड के लिए जिम्मेवार बताते हुए उनका नाम आरोपी के तौर पर दिया गया है। शव को रखकर सडक जाम कर दिया गया है। यातायात व्यवस्था ठप्प पड गयी है। आरोपियों को गिरफतार किया जाए, यह मांग जोर पकड़ चुकी है। दिन भर हंगामा जारी रहा। सड़क पर हजारों की संख्या मे ंलोगों की भीड़ उतर आयी है और हंगामा कई घंटों से जारी हैं। पुलिस हलकान है। आम लोग इस घटना के जाम के कारण परेशान,बेहाल है। लेकिन दिनभर कोई भरोसा देकर पीडित परिवार और इसके समर्थन मंे ंसडक पर उतर आए, लोगो को संतुष्ट नहीं कर सका। हंगामा जारी रहा और बेरमो थाना का इलाका पूरी तरह दिनभर हलकान रहा। और कोयला चोरी, कोयले की तस्करी का मामला गरम रहा। घटना के बाद पीडित पक्ष की ओर से दिए गए आवेदन में पूरे घटनाक्रम के लिए संतोष साव को कोयला माफिया बताते हुए उसके पूरे गैंग को जिम्मेवार ठहराया है। मृतका अनिता कुमारी के पति महेश कुमार ने कहा है की उसकी पत्नी जलावन के लिए कोयला लेकर आ रही थी तभी संतोष साव जो कोयला माफिया है और जिसकी दौलत सिर चढकर बोलती है। कोयले के अवैध कारोबर में जिसकी समानांन्तर सत्ता ही चलती है के गैंग के बबलू कुमार, सुरेश भुईयां सुनील भुईयां, सुरेंद्र भुईयां , वीरेंद्र कुमार भारती, धीरन कुमार भारती, संजय भुईयां, अरविंद भुईयां , ओम कुमार, गणेश भुईयां,बचिया देवी रोशन कुमार राहुल दीगार रागिनी देवी आशा देवी बरसा देवी पूजा देवी रिंकी कुमारी कंचन कुमारी कृपा कुमारी आदि ने हमला बरपा दिया और उसे तथा एक अन्य महिला पूनम देवी को मारपीट कर अधमरा कर दिया। फिर लात घूसों से पिटाई की गयी। इस घटना के बाद उसकी पत्नी को सीसीएल के ढोरी सेन्ट्रल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरांें ने उसकी पत्नी को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद शव को रात में ही पोसटमा्रर्टम के लिए भेज दिया गया। उसने शव को पोस्टमार्टम के लिए रात में भेजे जाने पर भी सवाल उठाया है। और यह भी कहा है की घटना के बाद संतोष साव ने उसे धमकी दी और शव को सीधे घर ले जाने और चुप रहने की सलाह दी। लेकिन वह इस हत्याकांड के बाद ना तो चुप रहने को तैयार हुआ और ना ही अपनी पत्नी की मौत पर कोयला माफिया की धमकी और प्रलोभन से झुकने पर तैयार हुआ। फिर एक मौत, जो चीख चीख चीख कर दरिदंगी की कहानी कह रही है, मौत जो बेरमो कोयलाचंल मंे बडे पैमाने पर चल रहे कोयले के अवैध कारोबार का सच सामने ला रही है। जनांदोलन के साथ न्याय के लिए एक मौत, जिसने काले हीरे के काले कारोबारियों की समाानंतर सत्ता व उनके अवैध करोबार को मिल रहे संरक्षण की सच्चाई सामने लाकर सबको बेनकाब कर गयी है। मौत बताती है की मामला सस्ते में नहीं निपटनेवाला। मामला अंजाम तक जायेगा। मामला जो काले हीरे के काले कारोबार का साम्राज्य बनानेवाले लोगों की कलई खोल रहा है और गरम हो रहा है। वैसे आवाज जिस तरीके से सामने आयी है, वह बताती है की एक तरफ ताकतवर कोयला माफिया सक्रिय है, जो पैसे से मजबूत हैं, जिसे तंत्र का समर्थन है। जिसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुुआ है और जिसका बडा साम्राज्य बोकारो जिले में ही नहीे बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में फैला पसरा है तो दूसरी ओर कमजोर परिवार। किसी तरह जिन्दगी बसर करनेवाला परिवार । आर्थिक तंगी से घिरा परिवार। ताकत व न्याय की इस लडाई में कई राजनीति नेता भी कूद पडे हैं। वैसे पूरा मामला बिगड़ा है कोयले के बंटवारे को लेकर ही,यही चर्चा चल पडी है। देखना दिलचस्प होगा की मौत को न्याय मिलता है या फिर आर्थिक ताकत और राजनीतिक संरक्षण मौत को हमेशा हमेशा के लिए खामोश कर देती है।
