जन जीवन लौटने लगा पटरी पर
मामले में छह गिरफतार, संतोष साव का भी उछला नाम
0 अजय अश्क
बेरमो में काले हीरे का विवाद, मारपीट, गर्भवती महिला की मौत, हंगामा और फिर राजनीतिक दखलंदाजी से गरम हुआ बेरमो कोयलांचल, मामले में छह लोंगों की गिरफतारी से कई घंटों बाद शांत हुआ और इस घटना को लेकर भाजपा का बोकारो बंद वापस ले लिया गया है। कल दिन भर इस घटना की वजह से बेरमो कोयालांचल अशंात रहा। सडक जाम कर दिया गया था। रोड पर मृतका की लाश रखकर हजारों की संख्या में लोग सडक पर उतर आए थंे और मौत चीख चीख कर इसंाफ मांग रही थी। महिला अनिता कुमारी की मौत का मामला गहरा गया था और सडक जाम रहने के कारण दिन भर पुलिस हलकान रही थी और आम पब्लिक भी परेशान बेहाल रही थी। सड़क पर उतरी भीड अनिता कुमार की मौत पर बिलख उठी थी और उसकी मौत के लिए जिम्मेवार लोगों की गिरफतारी व न्याय की मांग पर अड़ गयी थी। इस मामले को कोयला से जुडा बताकर हंगामा शुरू कर दिया गया था। बाद में मामले में राजनीति भी तेज हुई। विधायक व सांसद की इन्ट्री हुई और महिला की मौत राजनीति में फंसकर बवाल को बढाने लगी। फिर ऐलान कर दिया गया की 24 घंटा का वक्त बोकारो पुलिस के पास है, वह या तो इस मामले के आरोपियों को गिरफतार करें या फिर बोकारो बंद का सामना करे। एक तो दिन भर सडक जाम, आंदोलन व मौत का इंसाफ का मामला पुलिस को घेरे रहा, तो दूसरी ओर भाजपा का ऐसा ऐलान पुलिस को बड़ी चुनौती दे गया। इस दौरान जिले के कई वरीय अधिकारियों को फोन कर सांसद ढुलु महतो ने अपने लहजे में समझाया और स्पीकर ऑन कर फोन से बात करते हुए आमलोगो को बताया की वह प्रशासनिक अधिकारियों को समझाना जानते हैं और प्रशासन अगर सो रहा है तो उसे जगाना जानते हैं। तब तक शव सडक पर ही रहेगा और सडक जाम जारी रहेगा। पुलिस निकली अपने अभियान पर। अनिता की मौत का मामला दर्ज कर उसमें नामजद किए गए आरोपियों को धरने पकडने का सिलसिला शुरू हुआ और पुलिस नामजद छह आरोपियों को पकड कर अपना एक्शन दिखा गयी। उसके पास बंद को टालने व आंदोलन को खत्म कराने का आधार मिल गया। और इसके बाद आंदोलन जो कई घंटों तक जारी रहा, वह खत्म हुआ और बोकारो बंद का ऐलान वापस ले लिया गया। जिन छह लोगांे को दबोचा गया है उसमें बबलू कुमार, सुरेन्द्र भुईयां, वीरेन्द्र कुमार भारती, राजेश भुईयां, राहुल दीगार और धीरेन भुुंईयां शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों को गिरफतार कर राहत तो पा ली है पर इस घटना से काले हीरे के काले कारोबार को लेकर हुई बदनामी को मिटाने और कोयले के काले व अवैध कारोबार पर लगाम कसने की एक बडी जिम्मेवारी और चुनौती उसके पास खड़ी हो गयी है। मामला शंात तो पड गया है लेकिन आनेवाले समय के लिए राजनीति को हवा दे गया है। दिलचस्प बात यह है की इस मामले को लेकर दूसरे क्षेत्रों के जन प्रतिनिधियों ने अपनी सक्रियता दिखाई। दिन भर इस क्षेत्र के विधायक व सांसद इतने बडें आदोलन के बाद भी नहीं पहुंच सके। लेकिन धनबाद के सांसद ढुलु महतो और डुमरी के विधायक जयराम महतो मौके पर पहुंचकर अपनी अपनी बात से मामले को गरमाते रहे। अधिकारियों को हड़काते रहे और अपने विरोधियों को निशाने पर लेते रहे।
मौत अनिता की हुई थी। मारपीट के बाद मौत के इस मामले की पृष्ठभूमि में कोयला की भूमिका थी। जहां कोयला हो, वहां राजनीति ना हो,यह भला कैसे संभव था। मौत का इंसाफ सडक पर चल रहा था तो इंसाफ की आवाज उठाते उठाते हुए धनबाद के सांसद ढुलु महतो आए और दिखा गये अपने तेवर। साथ में यह भी की राजनीति का मौका मिले तो विरोधियों को कटघरे में खडा करने का अवसर गंवाना नहीं चाहिए।
अपने तेवर के लिए जाने जानेवाले विधायक जयराम महतो भी मौके पर पहुंुुच चुके थे। हैवानियत भरे इस कांड की निदा की गयी। प्रशासन को कोसा गया। बताया गया की व्यवस्थाएं सरकार के नियंत्रण में नहीं है। सामान्य लोगों को न्याय मिलना मुश्किल हो गया है, ऐसा आरेाप लगाया गया और फिर नसीहत दे दी गयी।
बहरहाल मामला और गरमाता इसके पहले ही राजनीतिक अल्टीमेटम ने पुलिस को खडका दिया। वह एक्शन मं आई और रात भर की गयी छोपमारी में छह लोगों को पकड़ लायी। सब यह जानना चाहते थे की इस कांड का मास्टर माईंड और देखते ही देखते कल तक सडक पर सब्जी बेचनेवाला और आज करोडों में खेलनेवाला संतोष साव पर क्या एक्शन होता हैं। जिस कोयले को लेकर विवाद था वह कोयला संतोष साव के पास ही जाना था। लेकिन विवाद हो गया और फिर यह मामला मौत तक पहुंच कर इसे और गहरा गया। इस घटना ने जहां एक तरफ बेरमो कोयलांचल में कोयले के काले कारोबार का संकेत दिया है, वहीं संतोष साव के मैकेनिजज्म पर भी सोचने पर विवश किया है की उसके पास वह पारस पत्थर कहां सें आया जिससे सडक पर सब्जी बेचते बेचते वह करोडों का कारोबार करने लगा। इस मामले में उसका नाम आया है। कई अन्य लोगांे का भी इस मामले मंे नाम आया है। फिलहाल उनकी गिरफतारी का प्रयास चल रहा है। अभी जो आंदोलन की वजह से सब कुछ ठहर या गया था, वह सामान्य होने लगा है। सडक पर आवागमन शुरू हो गया है। इसके साथ ही आमलोगों ने भी राहत की संास ली है, और पुलिस को भी राहत मिली है,जो पिछले कई घंटों से सांसत में थी। पर बडा सवाल भविष्य में नहीं होगी ऐसी घटना यह कैसे सुनिश्चित होगी। कौन देगा इसकी गारंटी।
