बिकने लगा झारखंड में आम 1000 रूपये प्रतिकिलो
मिया जोकी आम की किस्म ने बनायी अपनी खास जगह
0 अजय अश्क
बोकारो। आम अमूमन लोग सौ पचास रूपये प्रतिकिलों खरीदते रहे हैं। झारखंड में सीजन खत्म होते समय तक इसकी कीमत अक्सरहां दो सौ या उससे नीचे रही है। लेकिन आम अगर एक हजार प्रतिकिलों की कीमत पर बिकने लगे तो आप जरूर चौंक जायेगें। लेकिन बोकारो में ऐसा ही नजारा दिखा, जब आम प्रतिकिलों रूपये एक हजार की कीमत पर बिका। इसका गवाह बना बोकारो के जरीडीह का कृषि केंद्र।
यहीं पर आम बागवानी मेला का आयोजन हुआ था। प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से किसान अपने आम की उपज को लेकर इस मेले में आए थे। अलग-अलग वैरायटी के दजZनों किस्म के आम, मेला में आए लोगों को आकषिZत कर रहे थे। इस मेले में एक खास किस्म का आम विशेष तौर से लोगों को अपनी ओर खींच रहा था। मियां जाकी आम की इस आम की विशेष किस्म को लेकर किसान आया था कृषि केंद्र में। इस आम की कीमत ₹1000 प्रति किलो तय की गई। आम को जानने समझने वाले पारखी ने इस आम को देखा और फिर इसके पूरे स्टॉक को एक साथ खरीद लिया। मियां जांकी आम खास किस्म की होती है और विदेश में इसकी कीमत कहा जाता है कि एक लाख से डेढ़ लाख के भीतर प्रति किलो होती है। इस किस्म की आम की पैदावार अब बोकारो जिले में भी होने लगी है। मेला तो आम बागवानी का था ,लेकिन यहां यह वैरायटी खास बनी रही और लोगों के आकषZण में भी रही। दरअसल इस तरह के आयोजन के पीछे मकसद यह था कि किसानों को प्रोत्साहित किया जाए और नए तरीके से पैदावार बढ़ाने और नई किस्म को विकसित करने के लिए किसानों को मदद दी जाए। जरीडीह का आम उत्सव में वैरायटी वैरायटी के आम आए थे ,किसान अपनी उपज के साथ इस मेले में शरीक हुए थे और मेला में आए कृषक इस बात को लेकर उत्साहित नजर आ रहे थे कि अब उन्हें अपने उत्पाद के बाजार के लिए और उसके उचित दाम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसकी व्यवस्था होगी। जरीडीह में आम उत्सव किसानों की उम्मीद की किरण थी और कई तरह के आम लाए गए थे, जो बता रहे थे की आम के पैदावार में अब स्थानीय किसानों की रुचि बढ़ने लगी है। और उन्हें भी लगा है कि परंपरागत खेती के अलावा अब उन्हें खेती के अन्य उपज पर भी ध्यान देना चाहिए। आम उत्सव और मेले में आए सरकारी अधिकारी किसानों को उत्साहित कर रहे थे, प्रोत्साहित कर रहे थे और आने वाले समय के लिए उन्हें नए कृषि उत्पाद के लिए तैयार कर रहे थे। कृषि का क्षेत्र वैज्ञानिक तौर तरीके से विकसित होता जा रहा है और इस विकास का लाभ किसानों तक पहुंचाना भी इस आम उत्सव और आम बागवानी मेला का मकसद था।
कहने को तो यह आम उत्सव था लेकिन जिस तरीके से मियां जोकी आम ने इस उत्सव में अपने हिस्सेदारी निभाई यह आम उत्सव खास उत्सव बन गया। इस आम उत्सव में यह खास तरह का आम था, जो लोगों को आकषिZत कर रहा था और लोग इस आम की खासियत जानने के लिए अधिक उत्साहित नजर आए। अपने कृषि उपज की कीमत मिलने से जहां किसान उत्साहित थ,े जहां आयोजन में किसानों की भागीदारी ने मेला को खास बना दिया था, वही किसान भी और सरकारी तंत्र भी अपनी मेहनत के रंग को देखकर गदगद थे। मनरेगा योजना के तहत जिले में किसान बगवानी को भी प्रोत्साहित किया गया है,जिससे अपनी उपज और पैदावार को लेकर किसान बेहद उत्साहित हैं।
