बोकारो। फूल कोमलता का अहसास कराने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन फूल कभी कभी कांटे से भी ज्यादा चुभन देते हैं और इसकी चुभन दिल के अंदर तक देर समय तक महसूस कराती रहती है। और फूल अगर कोई पुलिसवाला दे तो समझ सकते हैं की यह व्यंग्यात्मक स्वागत किसी अनजान को अंदर तक किस तरह से झकझोंर रहा होगा। बोकारो के एक पुलिसकर्मी की ऐसी ही गंाधीगिरी ने ट्राफिक नियम तोड़नेवालो ंको झकझोंरा और अंदर तक हिला गया। अक्सरहां फूल से अतिथियों का स्वागत करते आपने देखा होगा, लोग ऐसे आतिथ्य से बाग बाग हो जाते हैं। लेकिन कोई नियम तोड़ कर अपनी जान की कीमत पर वाहन हांक रहा हो, यातायात नियमों के प्रति बेपरवाह हो उसे सबक सिखाने के लिए अगर फूल देकर स्वागत किया जाने लगे तो उसे क्या महसूस होता है उसकी बानगी वाहन जांच के दौरान दिखी।
फूल देकर यातायात नियम तोड़नेवालों का देखा आपने पुलिसकर्मी के स्वागत का अंदाज कैसा रहा। वाहन पर साथ आनेवाली महिला बिना हेल्मेट की थी। पुलिसकर्मी ने बताया समझाया, सुरक्षा का संदेश दिया। दोपहिए पर बैठा युवक सुनता रहा। महिला जो पीछे बिना हेल्मेट की, मोटरसाईकिल पर बैठी थी, उसे नसीहत अटपटी लगी। पुलिसकर्मी का यह सदव्यवहार उसे खल गया। उसने मुुंह फेरा और फिर असहज होकर वह दोपहिए से उतरी कर पांव पैदल ही तेजी से खिसक निकली। एक फूल ने ऐसा असर दिखाया की उसकी चर्चा चल पडी और पुलिसकर्मी की गांधीगिरी भी चर्चा में आ गयी।
सार्वजनिक तौर से ट्राफिक पुलिस का यह असरदार वाहन चेकिंग अभियान, गांधीगिरी, नसीहत और फिर जुर्माना वसूली की खूब चर्चा हो रही है। ट्राफिक पुलिस का एक ए एस आई ओशो प्रदीप की डियूटी आज गरगा पुल के पास लगी थी। वाहनों की जांच कर ट्राफिक नियमों का पालन सुनिश्चित कराने का काम था। साथ में नियमानुसार जुर्माना भी ठोंकने की डियूटी थी। हेल्मेट के प्रति खास जगरूकता चलायी जा रही थी। लोगांे का जवाब सॉरी, अब गलती नहीं होगी। यातायात नियमांे का हर हाल में पालन होगा। लोगों का ऐसा ही एक्सक्यूज। रटा रटाया बहाना। ई आखिरी गलती ह,ै अब ऐसा नहीं होगा। ऐसा जवाब सुनते सुनते ट्र्राफिक पुलिसकर्मी के कान पक चुके थे। हर रोज ऐसा जवाब देनेवाले दर्जनों मंे मिल जाते हैं। लेकिन दूसरे दिन भी वहीं गलती। उसने नहीं मानी उनकी सॉरी। दे दी नसीहत। एक हाथ में फूल और दूसरे हाथ में आन लाईन जुर्माना वसूलने की मशीन से निकली पर्ची। नसीहत भी दी और थमा दी आनलाईन जुर्माना की रसीद।
सडक पर चलिए, जान आपकी है इसकी सुरक्षा कीजिए। दस पांच हजार के मोबाईल की सुरक्षा की आपको ऐसी चिन्ता की आप उसकी सुरक्षा के हर पहलू पर गौर करते हैं और अपनी जान की बात आए तो बेपरवाही। अब नहीं चलेगी। नो सॉरी नो, एक्स्क्यूज। जुर्माना दीजिए, फूल लीजिए और नसीहत सुनिए। फूल को लेकर एक गाना था फूल तुम्हे भेजा है खत में फूल नहीं मेरा दिल है। यह मामला प्रेम प्यार का था,जिसमें ऐसा गाना गाया था। लेकिन ट्राफिक पुलिस के एएसआई ओशो प्रदीप ने ने समझा दिया, फूल तुम्हे दिया है हाथ में, जुर्माना ऑन लाईन किया है तुम्हें,यह तुम्हारी जान की सुरक्षा का सबक है। शायद यह सबक रोड पर चलनेवालों को सुधार सके। उन्हें उनकी भूल का अहसास करा कर अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सके। मकसद भी यही था।

