पंजाब के होशियारपुर में पुलिसकर्मी का हथियार छीनने के क्रम में कैदी की मौत।
0 पंजाब के हाशियारपुर से उडान लाईव के लिए अभिषेक भाटिया
0 पुलिस की कस्टडी से भागने के प्रयास मं जमकर हाथापाई
0 कैदी को लगी गोली, मौके पर ही हुआ ढेर।
0 कैदी के पास कहां से आया धरदार हथियार, बना हुआ है रहस्य
0 पुलिस जुटी जांच में
0 कैदी की पहचान नसीब सिंह के तौर पर
पंजांब के होशियारपुर में पुलिस के साथ हाथापाई कर भागने के प्रयास में लगे एक कैदी ने पुलिस पर हमला किया तेज धारदार चाकू से और उसे घायल कर पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनने की कोशिश की ।दोनों के बीच हाथापाई हुई। और फिर इसी दौरान पुलिस की गोली से उसकी मौत हो गयी। वह जेल से लाया गया था मेडिकल जांच के लिए अस्पताल। जांच के बाद उसे जब वापस एंबुलेंस तक ले जाया जा रहा था तभी हथकडी से जकडे़ उस कैदी ने किसी तेज धारदार हथियार से पुलिसकर्मी पर हमला कर दिया। बेकाबू हुए कैदी को रोकने की कोशिश हुई। पुलिसकर्मी ने अपने स्तर से प्रयास किया, लेकिन कैदी ने ताबडतोड धरदार हथियार से कई वार कर सिपाही को बुरी तरह घायल कर दिया। सिपाही ने अपनी पिस्तौल तानकर चेतावनी दी। लेकिन कैदी पर कोई असर नहीं पड़ा और उसने सिपाही का हथियार छीनने की कोशिश की। फिर अपने बचाव में पुलिस की ओर से फायर की गयी। गोंली लगने से कैदी की मौत हो गयी। कैदी और सिपाही के बीच की हाथापायी और कैसे देर समय तक होते रहा दोनों के बीच संधर्ष। सीसीटीवी में कैद घटना को।
दरअसल जेल प्रशासन के आग्रह पर पुलिस बल की सुरक्षा में कैदियांे को इलाज के लिए होशियारपुर के सरकारी अस्पताल में लाया गया था। इसी में एक विचाराधीन कैदी था नसीब सिंह। उसे इलाज के बाद लेकर जब सीनियर कांस्टेबुल जसदीप सिंह वापस एंबुलेंस पर ले जाने के लिए अस्पताल से बाहर निकल कर टोटो से जा रहा था, इसी दौरान पता नहीं कैसे कैदी के हाथ में धारदार हथियार आ गया और उसने भागने के नीयत से अपने साथ आए पुलिसकर्मी जसदीप पर हमला बोल दिया। उस पर नियंत्रण के लिए पुलिस जवान ने काफी प्रयास किया और फिर जब नाकाम रहा तो फिर जो घटना घटी उसके बारे मंे फरमाते हैं कैदी का आपराधिक इतिहास भी बताते हैं एसएसपी संदीप कुमार मलिक। घटना के बाद लोगो की भीड़ उमड़ी और कैदी को उठाकर अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। कैदी की पहचान नसीब सिंह के तौर पर हुई है।
इस घटना ने जहा इसके दुखद परिणाम के पहले लंबा संघर्ष दिखा था। इसी के साथ अफसोसजनक तथ्य भी सामने आया की घटना के दौरान किसी ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। जो टोटो चालक था वह भी मौका देखकर भाग निकला। यह बतलाता है की आमलोग पुलिस को मदद करने की बजाय उससे दूरी बनाने में ही अपनी भलाई मानते हैं क्योंकि उन्हें लगता है की किसी लफडा में फंसने की बजाय दूर ही रहना अच्छा है। यह बतलाता है की पुलिस अभी भी जनता का भरोसा जीतकर उन्हे अपना बना पाने में कामयाब नहीं हुई है। इस घटना ने पुलिस को चुनौती दी है की वह जनता से अपनी निकटता बनाए और उनका दिल जीतकर उनके अंदर अपने मित्र होने का भाव भरे क्योंकि ऐसा नहीं होना ही जनता का सहयोग नही मिलने का कारण है। बेहतर पुलिसिंग की कल्पना तब तक नहीं हो सकती, जब तक की जनता का दिल नहीं जीता जा सके और पुलिस व जनता एक दूसरे के करीब ना आ सके।

