बारवाघाट टूरिस्ट स्पॉट से बना मौत का स्पॉट
हर साल मौत, आपदा प्रबंधन सो रहा
0 अजय अश्क .
गरमी से राहत और कूल कूल की चाहत लोगांे की जान को आफत में डाल रही है। हर साल बरवाघाट में इंसान की मौत हो रही है। लेकिन बोकारो का आपदा प्रबंधन विभाग को मानों इन मौतों से कोई सरोकार ही नहीं। नतीजतन बेपरवाही में मौत हो रही है। कई घरांे का चिराग बूझ रहा है और आपदा प्रबंधन के कुप्रबंधन का यह हाल है की मौतंांे से सबक लेकर एहतियात के तौर पर कोई कदम उठाने की बजाय इसने मौत के बन रहे इस घाट पर चेतावनी का एक बोर्ड भी लगाना मुनासिब नहीं समझा। लोग ठंड की अहसास करते आ रहे हैं। गरमी से राहत के लिए दामोदर नदी में स्नानक रने को छलांग लगा रहे हैं और खतरे से अनजान रहकर अपनी जान गवंा रहे हैं। आंकडों पर गौर किया जाए तो पिछले कुछ सालों में गरमी से राहत की उम्मीद लेकर आए जितने लागों ने अपनी जान गंवायी है, वह चिन्ता बढ़ानेवाला है। हरला थाना व चन्द्रपुरा थाना के बीच से गुजरनेवाली दामोदर नदी के इस राजवाघाट को पहले पिकनिक स्पॉट के तौर पर लिया गया। फिर गरमी ने उकसाया करो ना कूल कूल का अहसास। फिर कूल कूल की चाहत ने खतरे से अनजान लोगांे को मौज मजे करने का अवसर दिया। यही मौज मजा उन पर भारी पड़नेे लगा है। जान पर भी भारी पडनेे लगा है। राहत की चाहत जान को आफत में डालने लगी है। एक बार फिर इस घाट ने बताया है की वह नाम से राजवाघाट है। लेकिन हकीकत में है मौत की घाट। एक बार फिर घाट पर ठंडक लेने आए तीन मित्र नदी में उतरे। तीनों डूबने लगे। एक को बचा लिया गया, लेकिन दो मित्रो की जल समाधि हो गयी। एक का शव बरामद कर लिया गया है। लेकिन एक की नदी में तलाश की जाती रही। स्थानीय गोताखोर लगाए गए, पर उसका कोई अता पता नहीं चल पाया। बोकारो के एल एच निवासी शनी कुमार तथा विष्णुकांत कुमार दोनों की डूबने से मौत होने की बात सामने आयी है। नहाने के क्रम में तीन युवक डुबने लगे मौके पर नहा रहे युवकों ने एक की जान बचाइ, वहीं दो डुब गये, लोगों ने खोजबीन शुरू की, जिसमें से एक विष्णुकांत का शव मिला, वहीं दुसरा युवक शनि कुमार का अभी तक पता नहीं चल पाया है, उसकी खोजबीन जारी है। प्रचंड गर्मी में युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना यह बारवाघाट अब तक कई की जान लील चुका है। यह डेंजर जोन बनता जा रहा है। यह घाट लोगों को खतरा से आगाह करने के एक बोर्ड का भी मोहताज बना हुआ है। क्या जिला प्रशासन संज्ञान लेगा। क्या आपदा प्रबंधन की नींद टूटेगी। मौत का चल रहा अंतहीन सिलसिला थमेगा। सवाल उठने लगा है।
