सक्सेस सफर बोकारो के कुम्हारडीह से अमेरिका का
बोकारो की बेटी श्वेता श्री की अमेरिका में लंबी छलांग
0 अजय अश्क
बो
कारो। गाव का बिलकुल पिछडा परिवेश। पूरी तरह से बुनियादी सुविधाओं का अभाव। और इसके बाद भी कोई छलांग लगाकर अभाव से जूझते गांव से अमेरिका जैसे देश में जाकर अपनी कामयाबी का परचम लहराए तो इसे इतिहास रचना ही तो कहेंगे। बोकारो जिले के तांतरी उत्तरी पंचायत की कुम्हारडीह की एक होनहार बेटी श्वेता श्री ने ऐसा ही कर दिखाया है, जिस पर पूरे गांव को नाज है।
झारखंड के बोकारो जिले के छोटे से गांव कुम्हारडीह की बेटी श्वेता श्री अपनी कामयाबी से आज पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन चुकी है। गांव की इस बेटी ने सफलता से शोध किया और श्वेता श्री को अमेरिका के विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना-शैंपेन (न्प्न्ब्द्ध से पीएचडी की उपाधि मिल गयी है। उसने दिखा दिया की प्रतिभा हो तो राह में कोई भी रोड़ा नहीं अटका सकता। कामयाबी कदमांे पर लोटेगी ही। वह अपने गांव की ही नहीं, बल्कि आसपास की पहली बेटी है जिसे अमेरिका में रिसर्च करने पर डॉक्टरेट की सर्वाेच्च शैक्षणिक डिग्री प्राप्त हुई है। श्वेता श्री ने मात्र चार वर्षों में अपनी पीएचडी पूरी कर असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका शोध विषय रहा है “मॉलिक्यूलर मेकैनिज़्म्स ऑफ केरासफोरबी सिग्नलिंग” शरीर की कोशिकाओं में होने वाले उन सूक्ष्म जैविक संकेतों को समझने पर आधारित है, जिनका संबंध कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से होता है। उनके शोध-निर्देशक प्रोफेसर स्लाइगर विश्वविख्यात वैज्ञानिक हैं और अमेरिका की प्रतिष्ठित नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज़ में शामिल किए जा चुके हैं।
श्वेता श्री का बचपन उसी गांव में बीता जहां वर्षों तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।पर उसने दिल मं कुछ करने की ठान ली थी। उसकी सोंच को आकार देने में दादा-दादी दुर्गा प्रसाद साहू और शकुंतला देवी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। दादी शकुंतला देवी पंचायत की कन्या विद्यालय चलाती थीं और उन्होंने उसे बचपन से सिखाया कि शिक्षा ही जीवन बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। उच्च शिक्षा के लिए श्वेता रांची बीआईटी मेसरा आयी। उसने बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। उनकी प्रतिभा ने उन्हें छात्रवृत्ति दिलाई। उसने टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया, जहां वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं, और बाद में शिकागो में पीएचडी शोध प्रारंभ किया। जिस गांव में कभी बेटियों की उच्च शिक्षा सपना मानी जाती थी, वहां आज बच्चे श्वेता श्री की कहानी सुनकर बड़े सपने देखने लगे हैं। गांव के लोगों को उस पर गर्व है। आखिर हो भी क्यों नहीं “कुम्हारडीह की बेटी अब दुनिया के वैज्ञानिक मंच पर झारखंड का नाम रोशन करने के लिए पहुंच चुकी है। उसकी सफलता समाज की प्रेरणा बन चुकी है।
भविष्य में श्वेता का लक्ष्य फार्मास्यूटिकल उद्योग में अनुभव प्राप्त कर कैंसर की सस्ती और सर्व सुलभ दवाएं ं विकसित करना है। उनका सपना “कैंसर-मुक्त भारत” है, जहां इलाज कि किसी परिवार की गरीबी आड़े ना आए । श्वेता श्री मानती हैं कि कि विश्व विद्यालय का ज्ञान का उद्देश्य केवल शोधपत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है। अपनी बेटी की इस सफलता पर तांतरी उत्तरी पंचायत का कुम्हारडीह गांव तो इठला ही रहा है, पूरे बोकारो जिला को उसकी उपलब्घियो ंने गौरवान्वित किया है। बोकारो की इस होनहार बेटी को उसकी उपलब्ध्यिों के लिए उड़ान लाईव परिवार की ओर से बहुत बहुत बधाईयां।
