
बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन को औद्योगिक संबंधों का हवाला देकर उसे अपनी नीतियों की समीक्षा करने की सलाह दी गयी है और साथ ही आगाह किया गया है जिस तरीके से मौजूदा समय में प्रबंधन आत्ममुगधता में लीन है, वह उसके लिए भारी पड़ सकता है। परिस्थितियों का आंकलन व मैनेजमेंट की कार्यशैली को देखते हुए ऐसा सुझाव भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और भारतीय उद्योग मजदूर संघ के महामंत्री कुमार अमित ने दिया है।मौजूदा समय में बीएसएल प्रबंधन के रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए कुमार अमित ने कहा कि प्रबंधन आत्ममुग्धता में लीन है और अपने ही कार्य शैली से सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साथ चुनौती दे रहा है। उनकी मानें तो एक ओर प्रबंधन अपने सेक्टर बारह आवासीय कालोनी के क्षतिग्रस्त ब्लॉक के नाम पर अपने ही नियमित कर्मचारियों को जबरन गैर-पसंदीदा आवासों में शिफ्ट करने को विवश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी प्लांट में अपनी पूरी जवानी खपाने वाले सैकड़ों सेवानिवृत्त कर्मियों को परिवार सहित सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। प्रबंधन की कार्यशैलियों ने विस्थापित अप्रेंटिसों को भी उनके हक के लिए बार-बार सड़क पर उतरने को विवश किया है। 39 माह के बकाया एरियर को रोककर प्रबंधन ने अपने नियमित कर्मचारियों को भी अपने विरोध में खड़ा कर रखा है। इतना ही नहीं, प्लॉटधारियों की दुकानों को बिना किसी ठोस कारण के तोड़ा जा रहा है, जिससे बोकारो के व्यापारी वर्ग में भी भारी आक्रोश है। कर्मचारियों के छोटे-मोटे निर्माण को नियमों का हवाला देकर तोड़ा जा रहा है, वहीं अधिकारियों/कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट का भय दिखाया जा रहा है। ठेका श्रमिकों के मामले में भी प्रबंधन का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है। जो ठेका कर्मी कट मनी नहीं लौटा रहे हैं, उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है, जबकि विस्थापितों के मुद्दों पर कोई सार्थक वार्ता नहीं हो रही है। श्री अमित ने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रबंधन कुछ चुनिंदा मजदूर संगठनों के साथ साठ-गांठ कर बैठक का कोरम पूरा दिखाकर मंत्रालय को दिग्भ्रमित कर रहा है। वर्तमान प्रबंधन अपने इस रवैये के कारण कर्मचारियों, रिटायर्ड कर्मचारियों, ठेका मजदूरों, विस्थापितों, अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं, प्लॉटधारियों, व्यापारियों, ठेकेदारों सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साथ चुनौती दे रहा है। प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि संवाद का द्वार खुला रखे और बेहतर औद्योगिक संबंध कायम करे। उन्होंने कहा कि बोकारो के हज़ारों लोगों ने अपने प्रिय प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड लिखकर स्थगित विस्तारीकरण को फिर से बोकारो की धरती पर लाया है। यदि इसी प्रकार औद्योगिक अशांति बढ़ती रही तो राष्ट्रीय इस्पात नीति-2017 के तहत बोकारो का प्रस्तावित विस्तारीकरण प्रभावित होगा, जो न केवल बोकारो के लिए, बल्कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने पर भी कुठाराघात होगा।
