

उड़ान न्यूज ब्यूरो
बोकारो। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान का 40वाँ स्थापना दिवस वृक्ष दीपावली के तौर पर आयोजित हुआ। इसके जरिए स्वास्थ्य और प्रकृति संरक्षण का समाज को संदेश दिया गया। हर साल की तरह इस साल भी परंपरागत उत्साह, श्रद्धा और पर्यावरणीय चेतना के साथ धनतेरस पर बोकारो स्थित पर्यावरण-मित्र वाटिका में वृक्ष दीपावली के रूप में मनाया गया।
आयुर्वेद एवं आरोग्य के अधिष्ठाता भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार विधि से वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना के साथ इस कार्यक्रम की शुरूआत हुई। संस्थान के पर्यावरण प्रहरियों ने भगवान धन्वंतरि से बोकारो, झारखंड सहित संपूर्ण देश के नागरिकों तथा समस्त जीव-जगत के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना की। संस्थान के उपाध्यक्ष पंडित अखिलेश ओझा ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई। संस्थान के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार पांडेय ने यजमान के रूप में संस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए पूजन किया।
इस अवसर पर संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा मुकुल ने संस्थान के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1987 में धनतेरस के पावन दिन ही संस्थान के संस्थापक एवं प्रख्यात पर्यावरणविद स्वर्गीय पंडित गौरी शंकर ओझा द्वारा की गई थी। विगत लगभग चार दशकों से संस्थान स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा प्रकृति के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि धनतेरस का पर्व केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि आरोग्य, निरोगी जीवन और समृद्धि की कामना का भी पर्व है। भगवान धन्वंतरि की आराधना हमें यह संदेश देती है कि स्वस्थ जीवन ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है। वहीं, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण के बिना स्वस्थ समाज की कल्पना अधूरी है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, हरित वृक्ष और जैव विविधता मानव जीवन के अस्तित्व एवं स्वास्थ्य के मूल आधार हैं।
पूजा-अर्चना के पश्चात संस्थान के पर्यावरण प्रहरियों एवं उपस्थित सदस्यों द्वारा पर्यावरण-मित्र वाटिका के वृक्षों के समीप सुरक्षित स्थानों पर दीप प्रज्वलित कर वृक्ष दीपावली मनाई गई। इस अनूठी पहल के माध्यम से प्रकृति माता के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया गया।


संस्थान का मानना है कि दीपावली का वास्तविक प्रकाश केवल घरों और प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका उजाला प्रकृति, पर्यावरण और समस्त जीव-जगत के कल्याण तक पहुँचना चाहिए। जिस प्रकार दीपक अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार वृक्षारोपण, वृक्षों का संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता प्रदूषण, जलवायु असंतुलन एवं पारिस्थितिक संकट जैसी चुनौतियों से मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि वृक्ष केवल लकड़ी, फल अथवा छाया देने वाले प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि वे जीवनदायिनी ऑक्सीजन, स्वच्छ वायु, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और जैव विविधता के संवाहक हैं। इसलिए वृक्ष लगाना और उसका संरक्षण करना आज सबसे बड़ी जरूरत है।


संस्थान ने इस अवसर पर समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक-दूसरे का पूरक समझते हुए प्रकृति संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प ले, जल एवं ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करे तथा प्रदूषण मुक्त वातावरण के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।
कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज और स्वस्थ पर्यावरण से स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। इस अवसर पर पं. गौरी शंकर ओझा जी के पर्यावरण संरक्षण संबंधी विचारों एवं आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके सपनों को साकार करने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और हरित पृथ्वी के निर्माण का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष रघुवर प्रसाद, लक्ष्मण शर्मा, विजय कुमार त्रिपाठी, वीरेंद्र कुमार चौबे, वीणा देवी, धर्मेंद्र कुमार, अक्षय कुमार दुबे, बबलू पांडे, शिवजी ओझा, ललन दुबे, अनुराग मिश्र, मृणाल कांत चौबे सहित अनेक पर्यावरण प्रहरी एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।
