

उड़ान न्यूज ब्यूरो एक्सक्लूसिव
नयी दिल्ली। सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र में एक भरोसा भरा बैंक का नाम है पंजाब नेशनल बैंक। आंख मूंद कर लोग इस बैंक पर भरोसा करते रहे हैं और अपनी गाढ़ी कमायी बैंक में सुरक्षित रहने के नाम पर जमा करते रहे हैं। इसी तरह लॉकर भी किराए पर लेकर कीमती सामान व जेवर आदि रखकर निश्चिंत रहते रहे हैं। लेकिन अब बैंक के कुछ भ्रष्ट और बेईमान लोगों की वजह से यह बैंक अपनी साख खोने लगा है और लोगों की इस बैंक पर जमा विश्वास अब हिलने लगा है।


हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आ गयीं हैं जिससे पंजाब नेशनल बैंक मंे अपन पूजीं को जमा रखना या लॉकर सेवा का लाभ लेना अब लोगों को खतरनाक लगने लगा है और वे अपने विश्वास को पूरी तरह से बनाए रखने से ड रने लगे हैं। बैंक के विभिन्न शाखाओं में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने बैंक के प्रति जमे विश्वास की नींव हिला दी है और लोगों को इस बैंक के भरोसे रहना अपना सबकुछ डूबो देने का खतरा मोल लेने जैसा लगने लगा है।


इस बैंक के कई कारनामें सामने आए हैं जिसने देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। लॉकर में जमा सामानों की सुरक्षा पर सवाल खडे किया है और अब आपकी जमा रकम की सुरक्षा को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। बैंक के कुछ लोगों की मिलीभगत से ऐसे ऐसे कारनामे किए गए हैं, जिसने सबको चौंका दिया है। पिछले एक साल पहले डालटेनगंज स्थित इस बैंक की शाखा के कई लाकर धारियों के लॉकर से कीमती सामान गायब करने का हैरत अंगेज कारनामा सामने आया और फिर बडे़ घोटाले का संकेत मिला। बैंक के कई अधिकारी, कर्मचारी नप गये और बैंक की साख दांव पर लग गया। अभी यह मामला चल ही रहा था कि एक ऐसी घटना सामने आयी, जिसने सबके पैरों तले की धरती ही हिला दी और भारत की अर्थव्यवस्था पर ऐसा प्रहार किया कि रिजर्व बैंक तक आश्चर्य में पड़ गया है।


बैंक का कारनामा बेहद ही खतरनाक अदंज में सामने आया जब पीएनबी के उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ब्रांच से रिजर्व बैंक भेजे गये करेंसी चेस्ट से लगभग 17 करोड़ 29 करोड़ के नकली और संदिग्ध नोट बरामद किए गए। यह मामला अगस्त 2026 में सामने आया जब भारतीय रिजर्व बैंक को भेजी गई नकदी में रूपये 4करोड़ 36 लाख की कमी पाई गई। इसके बाद बैंक में आंतरिक और विशेष ऑडिट कराया गया। और इस आडिट में नकली नोटों की राशि शुरुआती जांच में 7.40 करोड़ रही और बाद में बढकर यह आंकड़ा बढ़कर रूपये 17.29 करोड़ तक पहुंच गया। रकम के कम पाए जाने की घटना की सीसीटीवी फुटेज में एक पार्ट-टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार द्वारा गड्डियों से पैसे निकाले जाने के तौर पर सामने आया और फिर यह मामला इस भयेकर तौर से सामने आया। इस मामले मंे बैंक के सीनियर डिवीजनल मैनेजर रवि कुमार, करेंसी चेस्ट मैनेजर सुशील कुमार और अमित कुमार समेत कई अधिकारियों/कर्मचारियों पर गाज गिरी; कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया।
इस घटना में पंजाब नेशनल बैंक की साख पर सवाल उठा और यह बात भी सामने आयी कि नकली नोट अब विभिन्न बैंकों के रास्ते आरबीआई के करेंसी चेस्ट तक पहुंचने लगे हैं। अभी इस मामले के बीच ही पंजाब नेशनल बैंक की ओल्ड फरीदाबाद (रेलवे रोड) शाखा के लॉकर से करीब 25 लाख रुपये (लगभग 148.5 ग्राम सोना और चांदी के सिक्के) के आभूषण गायब होने का मामला सामने आया है। बैंक के लॉकरधारी 74 वर्षीय सुदेश कपूर और उनके बेटे आशीष कपूर ने शिकायत की कि की उनके लॉकर नंबर 46 से ये सामान गायब हुए लॉकरधारी ने वर्ष 2013 में इस बैंक में लॉकर लिया था। आखिरी बार मई 2024 (18 मई) में लॉकर का उपयोग किया गया था। इस साल मार्च और फिर 21 जुलाई 2026 को जब वे चाबी लेकर लॉकर खोलने पहुंचे, तो चाबी नहीं लगी। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में लॉकर को काटा/तोड़ा गया, तो अंदर रखे सोने के गहने और प्राचीन चांदी के सिक्के गायब मिले। इसके बाद तो हडकंप की हालत बन गयी। लॉकरधारी ने ओल्ड फरीदाबाद थाना पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इसी दौरान पंजाब नेशनल बैंक के सेक्टर पाई 1 नोएडा ऐच्छर गांव सिथत शाखा के खताधारकों से 35 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का मामला उजागर हुआ है। खाताधारकों का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने उनकी जानकारी या अनुमति के बिना उनके खातों में रखी फिक्स्ड डिपॉजिट को समय से पहले ही तोड़ दिया और उस रकम को आरटीजीएस के जरिए दूसरे लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। इसके अलावा, बचत खातों से भी बड़ी रकम अचानक गायब हो गई। इस मामले मंे ऐसे खाताधारकों को शिकार बनाया गया जिन्हें जेवर एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की गई ज़मीनों के बदले मुआवजे की मोटी रकम मिली थी और उन्होंने उसे एफ डी कर बैंक में जमा कर दिया था। इस 35 करोड़ के गबन में मैनेजर समेत 5 को बैंक प्रबंधन ने सस्पेंड कर दिया है। सूत्रों के अनुसार बैंक के उच्चाधिकारियों ने बैंक मैनेजर समेत पांच कर्मियों पर निलंबन की काररवाई करते हुए विभागीय विजिलेंस टीम को जांच में लगा दिया है। निलंबित किए गए बैंक कर्मियों पर खाताधारकों ने एफ डी परिपक्व होने के पहले ही बिना खाताधारियों की सहमति के समय से पहले तोड़कर उक् राशि को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर गोलमाल कर दिया गया। अभी तक की जांच में घोटाले का यह दायरा 35 करोड़ के आसपास का है। इस घोटाले से प्रभावित लोगों ने थाना में अपनी शिकायत दर्ज करायी है। दर्जनों खाताधारी इस तरह से लूट लिए गए और उन्हें तब पता चला जब वे बैंक में रकम निकालने गये। उनके खाता में पूरे पैसे थे, लेकिन निकालने गये तो उनके खाता में बैलेंस ही नहीं था। इसके बाद इस तरह की करतूते उजागर हुई और मामले की जांच आगे बढ़ी।
भारतीय किसान यूनियन का आरोप है कि यह प्रकरण 130 से 150 करोड़ रुपये के गबन का है।
