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लौह अयस्क पानी में बहायेगा बोकारो स्टील

लौह अयस्क पानी में बहायेगा बोकारो स्टील
बनी नयी योजना,सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल

बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट ने एक नई और आधुनिक व्यवस्था के माध्यम से अपने खदानों से लौह अयस्क लाने की तैयारी की है। इसके लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड देश के इस्पात क्षेत्र की सबसे लंबी स्लरी पाइपलाइन विकसित करने जा रही है। यह सेल के लिए अपनी तरह की पहली परियोजना होगी, जो बोकारो स्टील प्लांट के भविष्य के विस्तार और कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानकारी मिली है की
इस व्यवस्था में लौह अयस्क को खदान में ही बारीक पीसकर पानी के साथ मिलाया जाएगा और फिर पाइपलाइन के माध्यम से सीधे बोकारो स्टील प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में मालगाड़ियों (रेलवे रेक) पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में रेक की उपलब्धता, लौह अयस्क की लोडिंग, रेलवे के माध्यम से परिवहन तथा संयंत्र में अनलोडिंग जैसी पूरी प्रक्रिया समय और संसाधन दोनों की मांग करती है तथा कई बार रेलवे की उपलब्धता एवं समय-सारिणी पर भी निर्भर रहती है। स्लरी पाइपलाइन के माध्यम से लौह अयस्क सीधे बोकारो स्टील प्लांट पहुंचेगा, जिससे आपूर्ति अधिक तेज़, नियमित, भरोसेमंद एवं सतत बनी रहेगी। यह पाइपलाइन सेल की गुआ और बोलानी खदानों से हर वर्ष लगभग 8.3 मिलियन टन लौह अयस्क बोकारो स्टील प्लांट तक पहुंचाएगी। दोनों खदानों से आने वाला लौह अयस्क पहले जामदा पहुंचेगा, जहां से लगभग 258 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन के जरिए इसे बोकारो लाया जाएगा। भविष्य में बोकारो स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ने पर यही पाइपलाइन लगभग 16 मिलियन टन लौह अयस्क प्रतिवर्ष ले जाने में सक्षम होगी।

इस परियोजना की एक और विशेषता यह है कि लौह अयस्क को पहुंचाने में उपयोग किया गया पानी अलग पाइपलाइन से वापस खदानों तक भेजा जाएगा, जहां उसका दोबारा उपयोग किया जाएगा। इससे पानी की बचत होगी और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

परियोजना के अंतर्गत गुआ और बोलानी खदानों में लौह अयस्क तैयार करने की आधुनिक सुविधाएं, पंपिंग स्टेशन तथा बोकारो स्टील प्लांट में लौह अयस्क प्राप्त करने की विशेष व्यवस्था विकसित की जाएगी। लगभग 30 वर्षों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही इस परियोजना को करीब साढ़े तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह परियोजना न केवल परिवहन लागत को कम करेगी, बल्कि रेलवे नेटवर्क पर दबाव भी घटाएगी। साथ ही सड़क और रेल परिवहन की तुलना में धूल, डीजल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और हरित एवं टिकाऊ इस्पात उत्पादन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Udan Live
Author: Udan Live

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