Edition

[gtranslate]
Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

नियोजन का सवाल, बड़़ा बवाल, बीएसएल के लिए बना जी का जंजाल


अजय अश्क
बोकारो। नियोजन का सवाल बोकारो में आंदोलन के बवाल का कारण बन गया है और आंदोलन का यह बवाल बोकारो स्टील प्लांट के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। बोकारो में ऐसे माहौल ने प्रशासन की भी चिन्ता बढ़ा दी है और आंदोलन को लेकर उसके दुरगामी परिणाम की तरह तरह की आशंकाएं जतायी जाने लगी है। नियोजन के मसले को लेकर हताशा व निराशा के भाव से सड़क पर आंदोलन के साथ उतरे आदोलनकारियों को मिल रहे विभिन्न विस्थापित संगठनों,राजनीतिक दलों व श्रमिक संगठनों के समर्थन व सहयोग ने आंदोलन कर रहे लोगों को उर्जा से भर दिया है तो बोकारो जिला प्रशासन व बोकारो स्टील मैनेजमेंट की चिन्ता भी गहरा दी है। इधर बोकारो स्टील प्लाट भारी निवेश के साथ अपने एक्सपेंशन व एक्स्टेंशन की ओर बढ़ चला है, लेकिन बोकारो के बदलते औद्योगिक माहौल ने बड़ा सवाल खड़ी कर दिया है। इस बीच आंदोलनकारी लगातार तरह तरह से अपनी मांगों को लेकर मैनेजमेंट पर दवाब बनाने में लगे हैं और प्रबंधन को अपनी शक्ति दिखाने के साथ साथ कड़ा संदेश देने लगे हैं। मैनेजमेंट को दिखाने व बताने के लिए आंदोलनकारियों ने धरना स्थल टू टैंक गार्डेन,जहां वे पिछले कई दिनों से बेमियादी अनशन पर बैठेे हैं,से मशाल जुलूस निकाला और बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय इस्पात भवन के समीप मशाल चमकाते हुए प्रदर्शन किया। यह बताने की कोशिश हुई कि आंदोलन को हल्के में नहीं लिया जाए और या तो उनके नियोजन का हल निकला जाए या फिर प्रबंधन आंदोलन की धार को सहने की विवशता झेले। इस आंदोलन को मिल रहे जन समर्थन से लगातार इसके गहराते जाने की संभावनाएं बनती जा रही है। लेकिन जो सवाल नियोजन का है, जिसके लिए बवाल है और मैनेजमेंट के लिए जो जी का जंजाल बना हुआ है, वह जहां की तहां लटका हुआ है। आंदोलनकारी नियोजन से नीचे मानने को तैयार नहीं। प्रबंधन मौजूदा मैन पावर और का श्रमिकों की संख्या से ही परेशान है। को ही कम करने की विवशता से जूझ रहा है। सबकी अपनी अपनी मजबूरी है और इसी मजबूरी में यह आंदोलन लंबा खींचने के साथ गहराता भी जा रहा है, जिससे औद्योगिक संबंध के चटकने, शांत माहौल के गड़बड़ाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसी संभावनाएं बोकारो के आगे बढ़ने के मार्ग का सबसे बड़ा रोड़ा होगा।

परमीशन एक दिन के आंदोलन का, और खींचने लगा लंबा

बोकारो। बोकारो स्टील में नियोजन के मसले पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन के लिए निर्धारित टू टैंक गार्डेन में कुछ शर्तों के साथ एक दिन के आंदोलन का परमीशन अनुमंडल पदाधिकारी ने गोमती देवी के आवेदन पर विचार करते हुए दिया था। कई तरह की शर्त्ते भी इस अनुमति के साथ जोड़ दी गयीं थी।
पुलिस निरीक्षक-सह-थाना प्रभारी, बी०एस०सिटी थाना द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में विधि-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए टू-टैंक गार्डन परिसर में दिनांक 10.10.2026 को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन अनुमति दी गई थी। अनुमति का मजमून कुछ इस प्रकार है, जो अनुमंडल पदाधिकारी चास के ज्ञापांक 1378/गो०, दिनांक 09.10.2026 के आदेश में है।
कार्यक्रम के शांतिपूर्ण आयोजन की जिम्मेवारी आयोजक की होगी। किसी भी प्रकार का हथियार,लाठी,डंडा,तीर,धनुष,भाला इत्यादि को धरना में लेकर जाना वर्जित रहेगा। कार्यक्रम के दौरान अग्नि या विस्फोटक तथा ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग किया जाना वर्जित रहेगा। उपरोक्त धरना- प्रदर्शन के दौरान किसी भी परिस्थिति में विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं करेंगे। अन्यथा आयोजक के विरूद्ध विधि सम्मत् कार्रवाई की जायेगी। साईंलेंस जोन में ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग वर्जित रहेगा। धरना-प्रदर्शन के दौरान अमर्यादित शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे और न ही किसी व्यक्ति विशेष के चरित्र की टिप्पणी करेंगे। इस दौरान कोई भी व्यक्ति, शराब, गांजा, भांग आदि का उपयोग नहीं करेंगे। यदि कोई भी व्यक्ति शराब आदि मादक पदार्थ का उपयोग किया जाया जाएगा तो उसके विरूद्ध या आयोजक के विरूद्ध विधि सम्मत् कार्रवाई की जाएगी। अधोहस्ताक्षरी को बिना कारण बताये अनुमति को रद्द करने का अधिकार सुरक्षित होगा।

Oplus_131072

इसी के साथ यह भी बताया गया है कि विधि-व्यवस्था संधारण के लिए सत्यबाला सिन्हा, आवासीय दण्डाधिकारी, बोकारो विधि-व्यवस्था के सम्पूर्ण प्रभार में रहेंगीं तथा बीएससिटी की पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया है कि वे इस आंदोलन के दौरान विधि व्यवस्था की संपूर्ण प्रभार में प्रतिनियुक्त आवासीय दण्डाधिकारी, बोकारो से समन्वय स्थापित कर विधि-व्यवस्था संधारण कार्य में आवश्यक सहयोग करेंगे। लेकिन एक दिन का यह अनुमति प्राप्त आंदोलन बेमियादी बन गया है और मामला पेंचीदा होने लगा है। एक दिन कैडिल मार्च निकाला गया, फिर मशाल जुलूस भी निकाल कर मैनेजमेंट को कड़ा संदेश देने का काम किया गया है। एक दिन के आंदोलन के बेमियादी बनने पर बोकारो का वातावरण गरम होने लगा है।



बीएसएल की अपील, वार्त्ता से ही निकल सकेगा रास्ता
बोकारो प्लांट प्रबंधन ने औद्योगिक शांति और बोकारो की प्रगति का हवाला देकर अपील करते हुए बीएसएल के योगदान, राष्ट्र निर्माण में इसके बढ़ते कदम, देश की अर्थव्यवस्था, सामरिक महत्व में इसकी भूमिका और इससे जुड़े हजारों लोगो की रोजी रोटी की चर्चा की है। इस अपील में विस्थापितों के कल्याण और स्थानीय युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए बीएसएल के सार्थक प्रयास और उठाए गए कदमों की जानकारी भी साझा की गयी है। विस्थापितों के संदर्भ में अपनी प्रतिबद्धता के साथ मैनेजमेंट ने कहा है कि बीएसएल उपलब्ध सभी अप्रेन्टिसों के संवेदकों द्वारा संयंत्र के कार्य में प्राथमिकता के साथ नियोजित करने की बात कही है। उपलब्ध 950 अप्रेन्टिसों की लिस्ट केे 204 अप्रेन्टिसों को 03 अक्टूबर तक संयंत्र में कुशल कामगार के तौर पर संविदा नियोजन दिया जा चुका है और 50 से ज्यादा और युवा अप्रेंटिस सुरक्षा प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात संविदा के आधार पर नियोजन पाने की प्रक्रिया में है। इसके अलावा बीएसएल के विस्तारीकरण और अन्य सभी प्रोजेक्ट्स में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कुल मैन पावर का दस प्रतिशत विस्थापितों हेतु आरक्षित कर दिया गया है। अपील के जरिए बताया गया है कि संयंत्र के विस्तारीकरण से विस्थापितों के लिए भी अवसर के नये दरवाजा खुलेंगे। संयंत्र के विस्तारीकरण के 20,000 करोड़ रुपये का निवेश रोजगार, आधारभूत संरचना और औद्योगिक प्रगति का द्वार खुलेगा। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि विस्थापित युवाओं के लिए भी रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर सृजित होंगे। यह भरोसा भी दिया गया है कि अप्रेंटिस प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवाओं को भी संयंत्र में जल्द से जल्द समायोजित होने में सहायता मिलेगी।
प्रबंधन ने कहा है कि बोकारो स्टील प्लांट को एक थर्माे-सेंसिटिव प्लांट है, जहाँ संवेदनशील गैस पाइप लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे तीनों पालियों में कर्मी तत्पर रहते हैं। गेट जाम अथवा किसी अन्य कारण से परिचालन में व्यवधान उत्पन्न होने पर इन महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्थाओं के प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिससे संयंत्र ही नहीं, बल्कि एक व्यापक जन-समुदाय की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। फिर एक अपील की गयी है कि समस्या का समाधान का केवल और एकमात्र रास्ता वार्त्ता ही है, जिससे समाधान निकल सकता है।

Udan Live
Author: Udan Live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Buzz4 Ai