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मनाया पखवारा में जमकर हो रहा अंग्रेजी में काम, राजभाषा अधिनियमों की अनदेखी और हिन्दी पखवारा पर सवाल


उड़ान न्यूज ब्यूरो
बोकारो। बोकारो में जो विभाग राजभाषा पखवारा मना रहा है, वहीं विभाग राजभाषा की ऐसी की तैसी कर रहा है और अपने अंग्रेजी प्रेम को जग जाहिर कर राजभाषा पखवारें को महज खानापूर्ति साबित कर रहा है। एक तरफ बोकारो स्टील प्लांट का संपर्क व प्रशासन विभाग कंपनी की ओर से 14 सिंतबर से 28 सितंबर तक मनाए जाने वाले राजभाषा पखवारे में कामकाज को हिन्दी में करने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा है, वहीं खुद अपने कामकाज को हिन्दी में निपटाने की बजाय अंग्रेजी प्रेम का प्रदर्शन कर अपनी कथनी व करनी का फर्क तो बता ही रहा है, साथ ही यह साबित कर रहा है कि हिन्दी दिवस या राजभाषा पखवारा का आयोजन उसके लिए केवल सरकारी वाध्यता है। बोकारो स्टील प्लांट हिन्दी भाषी क्षेत्र में आता है, ऐसे में यह नियम है कि यहां सरकारी कार्यालय या सरकारी कंपनी का कामकाज हिन्दी में निपटाया जायेगा, लेकिन जिस विभाग को यह देखना है, वहीं इसकी चिन्ता नही कर रहा और जिस पत्र को केवल हिन्दी में निकालना चाहिए था या हिन्दी के साथ साथ अंग्रेजी में भी निकालना चाहिए था, वैसे पत्र या आदेश को केवल अंग्रेजी में ही निकाल कर अपना अंग्रेजी प्रेम का प्रदर्शन खुलेआम कर रहा है। राजभाषा और हिन्दी के प्रति उपेक्षा का यह भाव और किसी समय में शायद किसी की नोटिस में नहीं आ पाता, लेकिन ऐसी गलती लगातार उस समय में हो रही है, जब राजभाषा पक्ष मनाया जा रहा है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे हिन्दी में अपने कामकाज को निपटाए। इस मामले को पकड़ मंे आने के बाद बोकारो स्टील प्लांट में हिन्दी दिवस व हिन्दी पखवारे के आयोजन पर सवाल उठाया गया है और ऐसे आयोजनों को केवल खानापूर्ति करने वाला करार दिया गया है।
दरअसल हिन्दी के प्रति उपेक्षा का भाव उस समय नजर आया,जब विभाग की ओर से जारी किए गए कई पत्र या जारी किए जा रहे पत्र या आदेश राजभाषा के लिए बनाए गए नियमों 1976 के विरूद्ध जाकर जारी किए गए। ऐसा व्यवहार राजभाषा नियमों का उल्लघंन कर किया जा रहा है और राजभाषा अधिनियम 1963 कह धारा 3!3! के दायरे मंे आता है और इसे राजभाषा नीति के विचलन के तौर पर माना जाता है। इस नियम के तहत सामान्य आदेश संकल्प अधिसूचनाएं, टेंडर और प्रशासनिक कार्य या तो हिन्दी में होने चाहिए या फिर द्विभाषी। लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य यह कि हिन्दी में काम करने-कराने का काम देखनेवाला विभाग लोगों को हिन्दी में काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, राजभाषा पखवारा मना रहा है और खुद नियम विरूद्ध काम कर राजभाषा पक्ष के औचित्य पर सवाल खडे़ कर रहा है। यह काम भी ऐसे वक्त में किया जा रहा है,जब झारखंड जैसे क क्षेत्र में पड़नेवाले इलाके मंे भारत सरकार की कंपनी सेल बोकारो स्टील प्लांट मंे राजभाषा पखवारा मनाया जा रहा है। राजभाषा पखवारे के दौरान हिन्दी की उपेक्षा का यह मामला पकड़ में आया और राजभाषा पक्ष के आयोजन के औचित्य पर सवाल छोड़ गया।
बोकारो स्टील प्लंाट के अधिशासी निदेशक, मानव संसाधन के नियंत्रणाधीन और हिन्दी में अधिक से अधिक कामकाज कराने का दायित्व संभालनवाले बोकारो स्टील प्लांट के संपर्क व प्रशासन विभाग का राजभाषा प्रेम के सच को जाहिर किया है, वह है इस विभाग से 24 सितंबर 2026 को जारी किए गए पत्र संख्या ए ओ/2026/718 से जुड़ा आफिस ऑर्डर संख्या 4009/ंएओ। इस आर्डर को सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति को आधार बनाकर संपर्क व प्रशासन विभाग के सहायक प्रबंधक मानस चन्द्र रजवार ने जारी किया है। राजभाषा पक्ष के दौरान अंग्रेजी में कंपनी का आदेश जारी कर उन्होंने उन कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं और सहायता के बारे में जानकारी दी है, जिनके सेक्टर-12 सिथत आवास को खतरनाक घोषित किया गया है, और संरचनात्मक रूप से क्षतिग्रस्त आवासों को तुरंत खाली करके दूसरे आवासों में स्थानांतरित करने की पेशकश की गयी है। ऐसे प्रभावित कर्मचारियों को अपने घर का सामान नए आवास में ले जाने के लिए दो दिनों का विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जाएगा, जो 25.09.26 से 26.09.26 तक मान्य होगा। इसी तरह से उन्हें आवंटित नए आवासों में बिजली, सिविल या प्लंबिंग के तात्कालिक कामों के खर्च के लिए अधिकतम 5,000 की प्रतिपूर्ति धनराशि भी देने का प्रस्ताव दिया गया है। कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के हित में यह स्थानांतरण तुरंत किया जाना चाहिए। ऐसा आदेश जारी करते वक्त विभाग भूल गया कि राजभाषा पखवारा मनाया जा रहा है और हिन्दी में कामकाज करने व कराने की जिम्मेवारी उसी की है। इसे भूलकर अंग्रेजी मंे पत्र जारी कर दिया गया,जो अब गरमाने लगा है।
इधर राजभाषा पखवारे में हिन्दी की उपेक्षा कर राजभाषा पक्ष को केवल खानापूर्ति करनेवाले विभाग का यह अंग्रेजी में जारी किया गया आदेश अब मजदूरों को सवाल उठाने का अवसर दे गया है।
भारतीय उद्योग मजदूर संघ ने उठाए सवाल
इस बीच वह आदेश अब बहस का विषय बन गया है जिसमें अवकाश के साथ खतरनाक आवासों से तत्काल शिफट करने के लिए प्रबंधन की ओर से पेशकष की गयी है। जर्जर आवासों से शिफ्टिंग के लिए दो दिन की छुट्टी और 5 हजार रुपये देने की पेशकश पर भारतीय उद्योग मजदूर संघ महामंत्री कुमार अमित ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनकी मानें तो केवल छुट्टी पर्याप्त नहीं, अविलंब ऐसे पात्र कर्मचारियों को डी टाईप आवास आवंटित करने का काम करे प्रबंधन। भारतीय उद्योग मजदूर संघ की यूनियन कार्यालय में हुई बैठक में बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन द्वारा सेक्टर-12 के क्षतिग्रस्त (पूर्णतया क्षतिग्रस्त घोषित) आवासों में रह रहे कर्मियों को क्वार्टर शिफ्टिंग के लिए दो दिन का विशेष अवकाश और आंशिक मेंटेनेंस हेतु 5,000 रुपये देने के आदेश पर चर्चा हुई। महामंत्री कुमार अमित ने आंशिक संतोष व्यक्त करते हुए इसे अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि प्रबंधन को यूनियन के साथ हुई वार्ता के अनुरूप इन कर्मियों को अविलंब पूर्ण मेंटेनेंस युक्त, उनकी पसंद के डी टाइप आवास आवंटित करने चाहिए।
कुमार अमित ने मांग की कि यदि प्रबंधन तत्काल पूर्ण मेंटेनेंस कराने में असमर्थ है, तो आंशिक मेंटेनेंस के लिए दी जा रही 5,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर पूर्ण मेंटेनेंस लायक एकमुश्त राशि कर्मियों के खाते में दे। और प्रबंधन खाली पड़े डी टाइप आवासों की सूची सार्वजनिक कर पात्र कर्मियों को आवास चुनने का अवसर दे, ताकि शीघ्र आवंटन हो सके।
बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष रामावतार ने की, जबकि संचालन संयुक्त महामंत्री अशोक कुमार ने किया। इस अवसर पर उपाध्यक्ष धनंजय चौबे, मंत्री योगेन्द्र कुमार, संयुक्त महामंत्री जन्मजय गोस्वामी, कोषाध्यक्ष चंद्रप्रकाश, मीडिया प्रभारी लालबाबू, संतोष पंडित, शंकर विश्वकर्मा, राजीव कुमार, संजय कुमार, गोविन्द रविदास, जगन्नाथ, बलराम आदि उपस्थित थे।

Udan Live
Author: Udan Live

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