

टी एन भारती
नई दिल्ली। भारतीय भाषा के इतिहास में उर्दू काव्य संग्रह की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेषतः मिर्जा गालिब, मीर तकी मीर , शकील बदायूंनी,रफत फरोश की शायरी भारत में आज भी प्रसिद्ध है। बिजनौर की जन्म भूमि पर रफत सरोश की शायरी की धूम है। काव्य रचना और गायकी का चोली दामन का साथ है। उर्दू ग़ज़ल को चांद लगाने के लिए बंगाल की गायिका विदूषी सुमिता दत्ता का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। ऐसा ही नजर आया इंडिया हेबिटेड सेन्टर के अमलतास सभागार में आयोजित शाम ए गजल में।
इस अवसर पर रफत सरोश मरहूम की बेटी प्रोफेसर शाहीना सरोश खान ने गायिका सुमिता दत्ता को गुलदस्स्ता देकर स्वागत किया और कहा कि संगीत शायरी की जान है और गायिका सुमिता दत्ता को ग़ज़ल गायिकी में महारत हासिल है। उनकी आवाज कानों में रस घोलती है। सुरों की मलिका सुमिता दत्ता ने कहा कि उर्दू काव्य से आत्मा को शांति मिलती है। मिर्जा गालिब हो या मीर तकी मीर, मोमिन खां मोमिन हो या फिर शकील बदायूंनी और रफत सरोश हो सभी शायरो से दिल का रिश्ता है। उनकी मानें तो ग़ज़ल गायिका बैगम अख्तर,नूर जहां और आबिदा खानम से प्रेरित होकर ग़ज़ल गायिकी शुरू की। आज भी मिर्जा गालिब की शायरी में युवा वर्ग की रूचि है। उन्होंने मिर्जा गालिब, मीर तकी मीर,शकील बदायूंनी, मोमिन खां मोमिन, रफत सरोश की शायरी से समां बांध दिया।इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर शाहीना सरोश खान ने किया।
