
अजय अश्क
बोकारो। बोकारो में गरमाया विस्थापित आंदोलन, बोकारो स्टील प्लांट का बढ़ा संकट,बोकारो स्टील आफिसर्स एसोसियेशन ने भेजा त्राहिमाम संदेश, प्रशासन ने लगायी निषेधाज्ञा, हर रोज बोकारो कारखाना को लग रहा 35 करोड़ का चूना, बेमियादी आंदोलन का जारी रहा नौवां दिन, बिना नतीजा ही है आंदोलन। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग नियोजन और विस्थापितो को चतुर्थ श्रेणी की नौकरी का पूर्व में मिलता रहा आरक्षण बहाल हो। मुख्य मांग पर दोनों ओर से जिच। बिना नियोजन आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं आंदोलनकारी और नियोजन के मसले पर हाथ उठाकर खड़ा बोकारो मैनेजमेंट इस मांग पर विचार करने की बजाय अपनी विवशता जताते हुए इसे अलग थलग कर वार्ता से समाधान तलाशने की कर रहा अपील। लेकिन फंसा हुआ है पेंच और 10 अक्टूबर से चल रहा आंदोलन अब गहराने के साथ ही संकट बढ़ाकर आगे बढ़ चला है। इस हाल में बोकारो के औद्योगिक शंाति पर सवाल उठ रहा है। इस पूरे प्रकरण में दुर्गापूजा का उत्साह गुम हो गया है। प्रशासन विधि व्यवस्था को लेकर उलझा हुआ है। चिन्ता बढ़ी हुई है। आंदोलन के भविष्य और हश्र को लेकर भी चर्चा चल पड़ी है। इधर रविार की देर शाम में बोकारो स्टील प्लंाट के अन्य गेटों को भी जाम से मुक्त करने की बात सामने आयी है।
बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों के नियोजन और कारखाना के चतुर्थ श्रेणी के पद पर विस्थापित आरक्षण को लागू करने की मांग को लेकर बोकारो स्टील प्लांट में चल रहा विस्थापित आंदोलन और गहरा गया है।
झारखंड सरकार के वित मंत्री राधाकृष्णा किशोर की अगुवाई में बोकारो स्टील के डायरेक्टर इंचार्ज प्रियरंजन , एक्सक्यूटिव डायरेक्टर राजश्री वनर्जी जैसे अधिकारियों का शीर्ष प्रबंधन,जिला प्रशासन और विस्थापित आंदोलनकारियों के बीच कल देर समय तक चली वार्ता विफल रही और नियोजन जो आंदोलनकारियों की मुख्य मंाग है उस पर पेंच फंस जाने के कारण इस अंादोलन को और गहराने का ऐलान कर आंदोलनकारी डटे हुए हैं। पिछले दस अक्टूबर से अनशन के साथ शुरू हुआ आंदोलन बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेटों को जाम कर अनिश्चितकाल के आर्थिक नाकेबंदी तक चल पड़ा है और बोकारो स्टील प्लंाट के अंदर से सामानो को लेकर गाड़ियों के बाहर निकलने और बाहर से लाजिस्टिक लेकर आई गाड़ियों को अंदर जाने से रोक दिया गया है। मेन गेट को भी जाम कर प्लांट के अंदर काम करने के लिए आने जानेवाले मजदूरों, अधिकारियों को रोक दिया गया इस कारण प्लांट में डियूटी करने गये कर्मी, ठेका श्रमिक हो या फिर अधिकारी कई घंटों तक प्लंाट के अंदर ही फंसे रह गये। इधर बोकारो कारखाना प्रबंधन का संकट बढ़ता जा रहा है। बोकारो स्टील प्लांट की प्रमुख इकाईयों को बंद कर दिया गया है और किसी तरह कारखाना को प्राणवायु डालने की कोशिश हो रही है। इस आंदोलन की वजह से गैस पाईप लाईनों का रख रखाव सही तरीके से नहीं हो पा रहा और खतरा बढ़ता ही जा रहा है। बोकारो स्टील प्लांट को इसकी वजह से हर रोज 35 करोड़ ़ की आर्थिक क्षति हो रही है और यह संकट प्लांट के अस्तित्व पर सवाल उठा रहा है, ऐसी आशंका जतायी जा रही है।


बोकारो कारखाना थर्मों संसिटिव है और गैस पाईप नेटवर्क पर नियमित नजर रखना जरूरी है क्योंकि थोडी सी भी चूक केा मतलब है बडे़ हादसे को न्यौता। इस आंदोलन से खराब होते माहौल और औद्योगिक शंाति की वजह से बोकारो में 20 हजार करोड़ के एक्सपेंशन व एक्सटेंशन प्रोग्राम को लग सकता है धक्का इस तरह की आशंका भी जाहिर की जा रही है। बोकारो स्टील प्लांट के जेनरल मैनेजर संपर्क एवं प्रशासन तथा बोकारो स्टील प्लांट आफिसर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष ने पूरे मामले पर जिला प्रशासन को त्राहिमाम संदेश भेजा है। प्लंाट के सिचुएशन को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप कर कारखाना की रक्षा तथा काम करनेवाले लोगों की सुरक्षा संनिश्चित करने की मांग की है।


इधर लगातार गहराते आंदोलन और मेन गेट जाम कर सामने सडक पर जमकर बैठे लोगों को हटाते हुए जिला प्रशासन ने गेट के दौ सो मीटर के दायरे में निषेघाज्ञा लागू कर दी है। जिला प्रशासन ने बोकारो कारखाना केे परिचालन के पैरालाईज्ड होने के बढ़ते खतरा और गैस पाईपलाईनें समेत अन्य संवदेनशील इकाईयो से होनेवाले किसी भी तरह के अंदेशा को देखकर अपना एक्शन दिखाया है। फिलहाल मेन गेट को प्रशासन ने खुलवा दिया है, लेकिन अन्य गेटों के बेमियादी आर्थिक नाकेबंदी ने बोकारो प्रबध्ंान की नाक में दम कर रखा है। संकट गहरा रहा है। आंदोलन बेनतीजा आगे खींच रहा है। और प्रशासन की चिन्ता के साथ साथ अंादोलन के गहराते और बेनतीजा आगे बढ़ते जाने से दुर्गापूजा के उत्साह पर यह आंदोलन भारी पड़ गया है। हर रोज 35 करोड़ का नुकसान हो रहा है। आंदोलनकारी डटे हुए है, जब तक नियोजन नहीं तब तक चलेगा बोकारो स्टील प्लंाट का चक्का जाम आंदोलन। हालात अभी नियंत्रण में, लेकिन बोकारो कारखाना का बढ़ा हुआ है संकट। बोकारो की बेमियादी आर्थिक नाकेबंदी जारी है और विस्थापित आंदोलनकारियों का अनशन का आज नौवां दिन है। गेट जाम खत्म कर सभी गेटों को आंदोलनकारियों ने मुकत कर दिया है और बोकारो कारखाना की आर्थिक नाकेबंदी जो चल रहा थी वह खत्म हो गयी है। लेकिन धरना जारी है।


