

बेरमो में कोनार ओपेन कास्ट परियोजना में बेमियादी आंदोलन, ठप्प पड़ी कोल ट्रांसपोर्टिंग
0 अजय अश्क
बोकारो। जब सवाल अस्तित्व का बन जाए, जब सवाल परिवार की रोजी रोटी पर भारी पड़ने लगे और गहरा कर रोजी रोटी समेट कर पलायन की हद तक पहुंचाने लगे तो यह सवाल स्वाभाविक तौर से बनता है कि मजदूर, गरीब, विस्थापित और सीसीएल के कोयले के रोड सेल जिसकी वजह से कोयले की ट्रकों से ट्रांसपोर्टिंग करनेवाले चालकों,ट्रक मालिकों का पेट चलता है, वे जाएं तो जाएं कहां। जीं हां, ठीक सुना आपने,
जाएं तो जाएं कहां ? इसी सवाल का जवाब मांगने के लिए बेमियादी धरना के साथ सीसीएल के एकीकृत कोनार ओपेन कास्ट परियोजना के लिए कोयले की ट्रासंपोर्टिंग बांधित कर संगठित असंगठित मजदूर संघर्ष मोर्चा ने बेमियादी आंदोलन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन के जरिए कोयले की क्वालिटी का भी सवाल उठाया गया है। जो कोयला बड़ी पार्टियां आउट सोर्सिंग कंपनी के नाम पर अपनी मशीनों से खुद खोद कर ले जा रहीं हैं,उसका ग्रेड खास होता है। उन्होंने सीसीएल से जिस ग्रेड का कोयला लिया है, वे बाहर जांच में अपने ग्रेड से भी उंची ग्रेड की पायी जा रहीं है और सीसीएल रोड सेल में छोटे छोटे व्यवसायियों को,अपने स्तर से जिस ग्रेड का कोयला कह कर सुलभ करातीं है, वह बाहर जांच में फेल होकर अपने ग्रेड से नीचे के ग्रेड का पाया जा रहा है। इसने लोगों को सीसीएल की नीतियों के खिलाफ उबाल दिया है और फिर ऐसे लोगों को आंदोलन पर उतार दिया है।
तो सीसीएल बी एंड के एरिया के एकीकृत कोनार ओपेन कास्ट परियोजना प्रबंधन की नीतियों ने, लंबे समय से अंदर ही अंदर सुगबुगा रहे आंदोलन को आज जन्म् दे ही दिया। संगठित असंगठित मजदूर संघर्ष मोर्चा ने अपना आंदोलन तेज कर अपनी लड़ाई को गरीब बनाम अमीर की लड़ाई करार दिया है। दर असल मामला रोड सेल को लेकर गरमाया और फिर इस हद तक पहुंच गया। रोड सेल की नीति ने लोगों को ऐसा उबाला कि उन्हें अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए सड़क पर उतरना ही पड़ा। हजारों लोगो की रोजी रोटी से जुड़ा है यह मामला। और यह आंदोलन। सैकड़ों ट्रकों से जुड़ा है यह मामला। लगातार अपनी आवाज उठाते रहे लोग,जब अपनी बात सीसीएल प्रबंधन को सुनाकर न्याय की उम्मीद से नाउम्मीद हो गये, तो उन्होंने अपने आंदोलन के जरिए अपनी बात रख दी और सवाल पूछ डाला कि क्या जीने का अधिकार, रोजी-रोटी कमाने का अधिकार केवल पंूजीपतियों को ही है या गरीब, विस्थापितों, ट्रक चालकों और मजदूरों को भी है। क्या सीसीएल में बड़ेे लोग ही खुशहाल होंगे और गरीबों को अपनी रोजी रोजगार कर अपना व अपने परिजनों का पेट पालने का अधिकार नहीं है। वर्षों से काम कर अपनी जीविका चलानेवालेे अब पलायन कर जाएं। क्या उनकी बात भी सुनी जायेगी या प्रबंधन बड़े पैसेवालों का गुलाम बनकर उनकी ऐसी की तैसी करने की तैयारी में है। आंदोलनकारी बेहद गुस्से मंे हैं। अब आर या पार की लड़ाई बन गयी है। इस आंदोलन ने एकेकेओसीपी का संकट बढ़ा दिया है। कोयले की ट्रांसपोर्टिंग पर फिलहाल विराम लग चुका है।
आंदोलनकारी आरोप लगाते हैं कि बड़ी मात्रा में प्रबंधन कोयले का ई आक्शन करता है, जिस पर बोली लगानेवाले बड़े बड़े आद्योगिक घराना होते हैं और वे अपनी तरह से कोयला का उठाव ट्रांसपोर्टिंग करते हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से रोड सेल लोकल सेल के लिए छोटी छोटी क्वांटिटी में जब कंपनी की ओर से कोयले का ई आक्शन होता है तो अब छोटी छोटी मात्रा में भी बड़े व्यवसायी आने लगे हैं और कोयला खरीद रहे हैं। इससे छोटे छोटे व्यवसायी, उनसे जुड़े ट्रक मालिक, ट्रक चालक, मजदूर सबका संकट बढ़ रहा है। ऐसे व्यवसायी बड़े बडे हाईवा से कोयला उठा ले जा रहे हैं। इस तरह से कोयला के लोकल सेल पर भी बडे़-बड़े पूंजीपति हावी होने लगे हैं, जिससे संकट बढ़ने लगा है। कहनेवाले कहते हैं कि रोड सेल ही हजारों लोगों का सहारा है और अब उस सहारा को भी छीनने की साजिश की जाने लगी है। इसके अलावा एक बड़ा सवाल कोयले की क्वालिटी का भी उठाया जा रहा है। बड़ी मात्रा में कोयला का ई आक्शन लेनेवाले लोगों को सीसीएल की ओर से उनके कोयला के लिए उनकी मशीन ले जाने,खुद खोदने व कोयला का उठाव करने की छूट मिली है। जबकि छोटे छोटे व्यवसायियों को सीसीएल उनके आक्शन का ग्रेड वाला कोयला सुलभ कराती है। मजेदार व अचंभित करनेवाली बात यह है कि बड़े व्यवसायी जो कोयला लेकर जाते हैं और उन्होंने जिस ग्रेड का कोयला खरीद रखा है,बाहर जांच करने पर वह अपने ग्रेड से भी उम्दा ग्रेड का पाया जा रहा है और सीसीएल जिस ग्रेड का कोयला छोटे छोटे व्यवसायियों को सुलभ करा रही है उसकी जांच पर वह कोयला निम्न स्तर का पाया जा रहा है। ग्रेड खराब होने के कारण ऐसे व्यवसायी अपने कारोबार में घाटा उठा रहे हैं। अब उस मैकेनिज्म पर सवाल उठ रहा है कि बड़े व्यवसयियों का कोयला अपने ग्रेड से उपर हाई क्वालिटी का कैसे निकल रहा है और छोटे व्यवसायी जिसे सीसीएल का जो ग्रेड का कोयला सुलभ हो रहा है वह उस ग्रेड पर भी खड़ा क्यों नहीं उतर पा रहा है ? आंदोलनकारी आरोप लगा रहे हैं सबके पीछे साजिश है, बड़ी साजिश है। हजारों लोगों की रोजी रोटी छीनकर उन्हें चलता करने, पलायन के लिए मजबूर करने की साजिश की जा रही है। लेकिन,जो साजिश हो रही है,उसे कामयाब नहीं होने दिया जायेगा क्योंकि मामला केवल रोड सेल का नहीं है,बल्कि हजारों की संख्या में मजदूरों,ट्रक चालकों, विस्थापितों,गरीबों का भविष्य का है। जब वर्त्तमान ही संकट से घिरता जा रहा है, तो समझा जा सकता है कि उनके भविष्य का संकट कैसा होगा। इसका आंकलन ही सबको सहमा रहा है। बस इसी ने तैयार कर दी आंदोलन की जमीन। अब नतीजा क्या निकल रहा, सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
