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रास्ते के विवाद का ‘रास्ता’ निकालने की वजाय युवकों को रास्ते पर लाने के लिए थाने का दिखा दिया ‘रास्ता’,जेएलकेएम ने थाना पहुंचे युवकों को छुड़ाने का निकाला रास्ता


अजय अश्क
बोकारो। चास अनुमंडल के बिजुलिया में रास्ते का सवाल गहराकर बवाल का कारण बन गया है। इस रास्ते को लेकर बवाल गांव से निकल कर सीओ कार्यालय, फिर थाना और डीसी कार्यालय से जांच के दौर से गुजरते हुए फिर सीओ चास के कार्यालय पहुंचा और इसके बाद बवाल का कारण बन गया। मामला रास्ता का था। राह में पत्थर की खुदाई शुरू कर रास्ता रोकनेवाले को रास्ता पर लाने के सवाल ने गांव के लोगों को सीओ कार्यालय पर पहुंचा दिया। सीओ साहब ने दर्द कुद सुना कुूछ अनसुना किया जैसा आरोप लगाया गया है और इसके बाद रास्ता निकालने की बजाय तकनीकी कारण बताकर मामले को टाल दिया। फिर रास्ता निकाले देने की मांग को लेकर पीड़ितो ने थाना का दरवाजा खटखटाया। थाना ने बता दिया कि उसके पास रास्ता का रास्ता निकाल पाने का कानूनन अधिकार नही है। फिर पीड़ितों को सुझाया गया कि मैटर को प्रोपर मंच तक ले जाया जाए। पीड़ितों ने रास्ते का रास्ता निकाल देने की फरियाद लेकर उपायुक्त का दरवाजा खटखटाया। डीसी के जनता दरबार में अपनी शिकायत की और डीसी ने मामले की जांच कराने का आदेश जारी किया। पता चला है कि बीडीओ ने जांच की और जैसा बताया जा रहा है कि जांच में जिस जमीन को रोक कर पत्थर की खुदाई हो रही है, वह गैर-मजुरूआ पाई गयी है। जानकारी मिली हे कि इ सके बाद बडत्रे हाकिम के कार्यालय से मेल भेजकर पीड़ितों को सीओ से संपर्क करने को कहा गया। पीड़ितो ने सोंचा सीओ साहब अब जमीन को लेकर वस्तुस्थिति से अवगत होकर रास्ते पर आ गये होंगे और उनकी समस्या का समाधान हो जायेगा और रास्ता का संकट हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जायेगा। इसी सोंच से पीड़ित छोटे साहब से मिलने गये। कई युवक गये थे। लेकिन चैंबर में केवल दो को प्रवेश मिला। अंदर जाने पर सी ओ साहब उन्हें देखते ही रूआब में आ गये। बड़े साहब के यहां से मेल आया है देख लीजिए और रास्ता निकाल दीजिए। युवकांे ने सोंचा था कि के यहां से मेल आने के बाद साहब रास्ते पर आ जायेंगे । लेकिन साहब रास्ते पर आने की बजाय युवकों को ही रास्ते पर लाने के लिए हत्थे से उखड़ गये। गरमागरमी बहस शुरू हो गयी। रास्ते का कोई रास्ता निकालने की राह छोटे साहब सुझाने को तैयार नहीं थे और युवक इस तैयारी से गये थे कि साहब से कोई ना कोई रास्ता निकलवा कर ही आयेंगें। इसी बहस में युवको ने मोबाईल निकाल कर सारी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करनी शुरू कर दी। फिर मामला गरम हो गया। साहब गुस्से में तमतमा गये। साहब के चैंबर में बीडीओ साहब भी बैठे थे। वीडियों बनाने को लेकर मामला तूल पकड़ने लगा। साहब ने अपने लोगों को बुलाया और युवकों को नियंत्रण में करने को कहा। लेकिन कार्यालय में हंगामा हुआ। इस दौरान धक्का मुक्की भी हुई, हंगामा हुआ और साहब ने रास्ता मांगने गये लोगों को रास्ते पर लाने के लिए पुलिस बुला कर उनके संग लगा कर युवकों को थानें का रास्ता दिखा दिया। इस तरह रास्ते का सवाल हल होने की बजाय कई लोगों को रास्ते पर लाने का कारक बन गया। दरअसल मामला बिजुलिया का है। ग्रामीण कहते हैं कि यहां उस रास्ते को रोक कर उस पर पत्थर की खुदाई शुरू कर दी गयी है, जिससे लोग आवाजाही करते हैं। रास्ता रोके जाने से ग्रामीण संकट में पड गये। ग्रामीण परेशान होकर रोड पर आ गये। लोग रास्ते को लेकर दर दर भटकने लगे। लेकिन सरकारी तंत्र ने रास्ता निकालकर उन्हें रास्ता देने की बजाय रास्ते पर लाने के लिए पुलिस का सहारा ले लिया। युवक रास्ता मांगने गये सीओ साहब से, लेकिन साहब मांग को लेकर रास्ते पर नहीं आए और रास्ता निकालने की बजाय अपने चैंबर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। फिर रास्ते के लिए इन लोगों ने थाना का रास्ता मापा। लेकिन थाना ने जमीन का मैटर होने का मामला बताकर उन्हें अपनी फरियाद उचित मंच पर करने की राह सुझा दी। और जब मैटर सब जगह से होकर सीओ आफिस पहुंचा तो अपने सुर में लगे साहब को नागवार गुजरी। साहब को रास्ता के मसले पर रास्ता निकाल देने का आग्रह किया गया। लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो युवकों ने मोबाईल से उनकी बात रिकार्ड करनी शुरू कर दी। साहब ने फरमाया शांत बैठ जाओं वरना रास्ते पर लाते देर नहीं होगी। लेकिन रास्ते के सवाल ने युवकों को ऐसा उकसा दिया था कि रास्ता निकालने के लिए वे किसी की परवाह करने को तैयार नहीं थे और किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गये। फिर साहब ने पुलिस बुला लिया और युवकों के होश ठिकाने लाने और उनको रास्ते पर लाने के लिए पुलिस के संग लगा दिया। अब रास्ते का सवाल लेकर दर दर भटक रहे युवक पुलिस थाना के चक्कर में पड़ गये हैं। इस तरह से एक रास्ते के बवाल पर तंत्र ने राह सुझाने और समस्या का रास्ता निकलाने की बजाय फरियादियों को ही रास्ते पर लाने का उपाय कर दिया। पूरा प्रकरण सीसीटीवी में कैद हुआ है। बाद मे ंजेएलकेएम ने मामले में अपना हस्तक्षेप किया और फिर मामला सुलट गया। इस तरह रास्ते को लेकर उठा विवाद तो रास्ते पर आ गया, लेकिन रास्ते का वह सवाल बिना हल हुए रास्ते में ही लटका रह गया।

Udan Live
Author: Udan Live

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