

उड़ान न्यूज ब्यूरो
बोकारो।नवरात्रि, पूजा का शांतिपूर्ण तरीके से सौहार्द के साथ सफल आयोजन की चुनौती, विधि व्यवस्था, नियोजन का आंदोलन और बोकारो स्टील प्लांट के निर्वाध तरीके से परिचालन पर मंडराता खतरा यह ऐसा दृश्य है जिसने बोकारो के तापमान को गरमाया और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है। इधर हाई लेबल बैठक हुई बोकारो के उपायुक्त की अध्यक्षता में। इसमें प्रशासन के साथ साथ बोकारो स्टील प्लांट के डायरेक्टर इंचार्ज भी शामिल हुए। सिचुएशन पर मंथन किया गया। बोकारो के टू टैंक गार्डेन में पूरी उर्जा के साथ चल रहे नियोजन के आंदोलन और बेमियादी अनशन पर चर्चा हुई। उसके लगातार लंबा खींचते जाने पर उसके पड़नेवाले दूरगामी परिणाम पर मंथन किया गया और प्रशासन ने हर स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया और प्रबंधन को भी समझा दिया कि वह आंदोलनकारियों की मांगों पर वार्ता का रास्ता खोले रखे और सहानुभूति के साथ विचार का गतिरोध समाप्त करे। इस मंथन के बाद इस बैठक के जरिए ही इस बार आर पार की लड़ाई के मूड से आए आंदोलनकारियों को प्रशासन ने संदेश दिया कि दुर्गापूजा और अन्य पर्व त्योहारों को देखते हुए आंदोलन खत्म करने कर दें। और किसी भी हाल में कानून व्यवस्था के हालत ना पैदा हो इसे सुनिश्चित करें। प्रशासन ने अपील की कि शायद उसकी अपील आंदोलनकारियों के दिल को छूं जाए और एक साथ जिला प्रशासन व बोकारो स्टील प्रबंधन के सामने आया संकट टल जाए। लेकिन इसका यह असर हुआ कि आंदोलनकारियों ने आज से बोकारो स्टील प्लांट का गंट जाम कर उसका हुक्का पानी बंद करने का ऐलान करते हुए अपने आंदोलन को टू टैंक गार्डेन की चहारदिवारी से बाहर निकाल कर प्लांट का गेट संख्या 9 जो दुग्गल गेट के नाम से जाना जाता है और गेट नंबर दस जो स्टील गेट के नाम से जाना जाता है को जाम कर दिया है और प्लांट के लिए जरूरी मेटेेरियल लेकर आनेवाली गाड़ियों को अंदर प्रवेश करने से रोक दिया है गेटों को जामकर आंदोलनकारी नारे बाजी कर रहे हैं।


विस्थापितों की एकता का जिन्दाबाद कर रहे हैं और इस बार की लड़ाई को आर या पार का बता रहे हैं। आंदोलन की वजह से प्लांट के लिए सामग्री लेकर आयी गाड़ियां बाहर ही खड़ीं हैं और बाहर में गाड़ियों की लंबी कतारें लग गयीं हैं। बोकारो प्लांट के ये दोनों गेट इसलिए काफी अहमियत रखते हैं क्योंकि इन्हीं गेटों से बड़ी बड़ी गाडियां लोजेस्टिक सपोर्ट के साथ प्लांट में इन करती हैं। गेटों के बंद कर देने और उर्जा के साथ आंदोलन चला रहे विस्थापितों की वजह सें बोकारो स्टील प्लांट का संकट बढ़ता दिख रहा है और आंदोलनकारी भी इससे बेहद उत्साहित हैं क्योंकि बोकारो स्टील प्लांट का संकट जितना बढ़ेगा, उसकी परेशानी जितनी बढे़गी इनके आंदोलन का ग्राफ उपर चढ़ेगा और आंदोलन का नतीजा भी जल्द से जल्द निकल सकेगा। जो जानकारी मिल रही है कि इस बार आंदोलन के लिए खास कर यह फेस्टिव सीजन चुना गया है ताकि इसकी वजह से सभी तंत्र एक्शन में दिखे और प्रेशर एजीटेशन मुकाम पर पहुंच सके। इधर टू टैंक गार्डेन में आंदोलन चल रहा है। बेमियादी अनशन जारी है। कई की हालत खराब हो चुकी है और उन्हें मेडिकल टीम के निर्देश पर अस्पताल पहुंचाया जा चुका है। इस आंदोलन को लगातार विभिन्न दलों का समर्थन मिल रहा है। विभिन्न विस्थापित संगठन भी एकजुट होकर आंदोलन को या तो सपोर्ट कर रहे हैं या फिर खुद भी शामिल हो गये हैं। एक लंबे समय के बाद नियेाजन का यह आंदोलन इस बार धारदार बनता जा रहा है। इस बीच सांसद ढुल्लु महतो भी कई दिनों के बाद आंदोलन में आए। चंद समय बैठे। आंदोलनकारियों को संबोधित किया। फिर सबका बेड़ा भागवान राम जी पार करेंगे, विस्थापितों को छलनेवालों का राम जी भला नहीं करेंगे ऐसा कहते हुए वे वापस चले गये। सांसद जी अब तक तेवर दिखाते थे, हड़काते थेर्, इंट से ईंट बजा देंगे, विस्थापितों के सवाल पर गरजतेे थे। लेकिन इस बार उनकी पूरी आस्था राम जी के प्रति दिख रहीे थी। आंदोलनकारी जिस तेवर में सांसद को सुनना चाहते थे। जिस तेवर में सांसद की कल्पना कर रहे थे, वैसा उन्हें नजर नहीं आया। सांसद रामजी के प्रति अपनी आस्था दिखा रहे थे। समझ मंे नहीे आया कि सांसद जी अब सारे काम को रामजी के भरोसा ही छोड़ना क्यों चाहते ?


