

उड़ान न्यूज ब्यूरो
बोकारो। बोकारो स्टील में नियोजन को लेकर चल रहे आंदोलन के गहराने के बाद अचानक से वार्त्ता की सुध आयी, वार्त्ता आयोजित की गयी, लेकिन मामला फंस गया नियोजन की मुख्य मांग पर आकर। वार्त्ता का निमंत्रण मिलने पर सर्किट हाउस पहुंचे आंदोलनकारी प्रतिनिधियों को पहले समझाने का प्रयास किया गया। कई तरह की बातें की गयी। लेकिन मामला जब नियोजन का आया तो बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन की ओर से सीजीएम के नेतृत्व में पहुंची टीम ने अपने हाथ खडे़ कर दिए। इस हाल में विस्थापित आंदोलनकारी वार्ता में आगे बढ़ने से मना कर गये। वार्ता में बोकारो जिला प्रशासन की ओर से आवासीय दंडाधिकारी और बोकारो के सिटी डीएसपी भी थे। आंदोलनकारियों ने कहा कि आंदोलन की मुख्य मांग ही नियोजन है, और उस पर निर्णय लेने के लिए जो सक्षम पदाधिकारी हैं, वे खुद आने की बजाय कनीय अधिकारी को भेजकर खानापूर्ति कर रहे हैं। इस हालत में जब निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं है तो वैसे अधिकारियों से वार्ता का कोई मतलब ही नहीे रह जाता। ऐसा कहते हुए वार्ता में पहुंचे आंदोलनकारी वार्ता के टेबुल से उठकर बाहर निकल गये और दो टूक कह गये कि जब कोई नतीजा ही नहीं निकलेगा तब आंदोलन वापस लेने की कैसे सोंचा जा सकता है।


आंदोलनकारियों ने ऐलान कर दिया है कि अब आंदोलन का दायरा बढ़ेगा और बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेट जाम किए जायेंगे। यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक कि नियोजन की मांग पूरी नहीं हो जाती।
जिला प्रशासन ने माना है कि वार्ता सफल नहीं हुई, लेकिन वार्ता से ही समाधान निकलना है। इसलिए फिर प्रयास किया जायेगा कि कोई ना कोई सर्वमान्य हल निकाला जाए ताकि आंदोलन जो लंबा खींचता जा रहा है उस पर विराम लग सके। बोकारो के आवासीय दंडाधिकारी ने कहा है कि वात्ता्र का गतिरोध दूर किया जायेगा और प्रशासन की ओर से वार्ता की और कोशिश की जायेगी।


फिलहाल वार्ता विफल हो जाने के बाद आंदेालकारी भडक गये हैं। बीएसएल नियोजन के मामले में आगे बढ़ने को तैयार नहीं और आंदोलनकारी बिना नियोजन की मांग के पूरी होने के वापस लौटने को तैयार नहीं। इस जिच में आंदोलन के गहराने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। पूजा का अवसर है और आंदोलन का यह दौर जिस तरीके से चल रहा है, उसके खत्म होने के आसार दिख भी नहीं रहे। चास की अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढाढा ने आंदोलनकारियों से अपील की है कि वे पूजा के महत्व को देखते हुए फिलहाल अपने आंदोलन को विराम दें और विधि व्यवस्था समेत पूजा के शांतिपूर्ण आयोजन में अपना सहयोग दें। आज इसकी बड़ी जरूरत है कि पूजा के महत्व को देखते हुए आंदोलनकारी इस आंदोलन को खत्म करने पर विचार करें और बोकारो में पूजा के माहौल को उत्साह के साथ मनाने का अवसर सबको मिल सके। अब यह गेंद आंदोलनकारियों के पाले में है। प्रशासन ने जो अपील की है, उस पर उनकी ओर से किस तरह से विचार किया जाता है। फिलहाल वार्ता के असफल होने के बाद जिस तरीके से लोग भडक कर गये हैं उनका कल का एक्शन क्या होता है इस पर सबकी नजर टिकी हुई है। इस आंदोलन ने बोकारो के तापमान को गरम कर रखा है।


