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बोकारो का स्वामी सहजानंद सरस्वती बीएड कालेज के अध्यक्ष का अचानक से इस्तीफा, यूनिवर्सिटी ने की संबंद्धता रद्ध, वित्तीय अनियिमतताओं का आरोप, जांच की उठायी मांग


अजय अश्क
बोकारो। बोकारो मे ंबीएड की शिक्षा से जुड़ा स्वामी सहजानंद सरस्वती बीएड कॉलेज का संकट एक बार फिर गहरा गया है। तीन साल से संस्थान का निर्विरोध अध्यक्ष के तौर पर असहज महसूस करते हुए काम करतीं रहीं सुषमा देवी ने अचानक से अपना इस्तीफा पत्र बोकारो के उपायुक्त को भेज दिया है और साथ में अपनी असहजता की जानकारी भी दी है और संस्थान के कार्यकलापों की बड़ी जांच कराने की मांग भी कर दीं हैं। सुषमा देवी बोकारो जिला परिषद की अध्यक्ष भी रह चुकीं हैं और 2023 से स्वामी सहजानंद सरस्वती बी एड कालेज व शिक्षण संस्थान की निर्विरोध अध्यक्ष के तौर पर काम करतीं रहीं हैं।


उन्होंने अपने पत्र में उपायुक्त को कहा है कि स्वामी सहजानंद सरस्वती बी.एड. कॉलेज, बोकारो के संबंध में पूर्व में दिए गए आवेदन के आलोक में संस्था के सम्पूर्ण कार्यकाल की जाँच करायी जाए और इसी के साथ वर्तमान परिस्थितियों का हवाला देकर अध्यक्ष पद त्याग देने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि उन्हें पदमुक्त किया जाए और चुनाव कराकर नयी कमेटी का गठन कराने तक इस संस्थान का संचालन प्रशासन की देख-रेख में किया जाए। उन्होंने अपने त्यागपत्र के साथ ही अपने द्वारा दिए गए पत्रांक 1785 दिनांक 30.07.2025 और पत्रांक 1863 दिनांक 25.09.2026 को भी इस जाँच में शामिल कराने का आग्रह किया है। इस पूरे प्रकरण में वितीय अनियमितताएं, फीस की रकम का पारदर्शी कागजात नहीं आदि का भी सवाल उठाया गया है। उनके पत्र से ही साफ हो रहा है कि संस्थान का कार्यकलाप नियमानुसार नहीे हो रहा है और जो संकेत मिल रहा है उसमें बडे़ पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई है।
उड़ान लाईव को मिले उनके त्याग पत्र का मजमून इस प्रकार है-

सेवा में,
श्रीमान उपायुक्त महोदय,
बोकारो, झारखण्ड।

प्रेषक
सुषमा देवी
अध्यक्ष,
स्वामी सहजानंद सरस्वती शिक्षण संस्थान, बोकारो।

विषय – स्वामी सहजानंद सरस्वती बी.एड. कॉलेज, बोकारो के संबंध में पूर्व में दिए गए आवेदन के आलोक में संस्था के सम्पूर्ण कार्यकाल की जाँच एवं वर्तमान परिस्थितियों के कारण अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र के संबंध में।
संदर्भ पत्रांक 1785, दिनांक 30.07.2025
पत्रांक 1863, दिनांक 25.09.2026
महाशय,
मैं सुषमा देवी वर्तमान अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती शिक्षण संस्थान बोकारो की निर्विरोध (2023) निर्वाचित अध्यक्ष हूँ। यह चुनाव तत्कालीन उपायुक्त महोदय के निर्देश पर हुआ था लेकिन मैं प्रारंभ के दिनों से ही यह संस्थान चलाने में असहज महसूस कर रही हूँ। पहले ही दिन से उक्त संस्थान के निर्वाचित सचिव श्री अमित आनंद संस्थान में अनुपस्थित रहे संस्थान का संचालन का जिम्मा निर्वाचित उप सचिव श्री रामाकांत शर्मा को तदर्थ समिति का सचिव बनाया गया तथा वे बी. एड कालेज एवं स्कूल में कमिटी बनाकर संचालन करने लगे लेकिन विद्यार्थियों से लिया जाने वाला फीस/धन का कोई आय-व्यय पारदर्शी नहीं रखा जाने लगा, फीस का धन राशि कैसे-कैसे लिया जाने लगा और
इसका खर्च हुआ इसके बारे में मेरे द्वारा बार – बार आग्रह करने के बावजूद भी ना ही कार्यकारी सचिव और ना ही कोषाध्यक्ष द्वारा शिक्षण संस्थान का आय-व्यय का लेखा जोखा प्रस्तुत किया गया, इसी बीच इन्हीं सब कारणों में विश्वविद्यालय द्वारा बी. एड की मान्यता समाप्त कर दी गई, इन सब कारणों से मैं काफी व्यथित होकर उपायुक्त महोदय को कमिटी भंग या जब तक चुनाव नहीं हो तब तक जिला प्रशासन से शिक्षण संस्थान को चलाने हेतु नई कमिटी का गठन करने का आग्रह किया गया है।

महाशय, मेरे इतने अल्पकाल में शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष बनने पर इतना अनुभव हुआ कि शिक्षण संस्थान के स्थापना काल से ही इसकी भारी वित्तीय अनियमितता रही है तथा समय-समय पर इसे अपने ताकत और प्रभाव के बल से कब्जा कर के चलाया गया है, इस शिक्षण संस्थान को चलाने के लिए न्यास बनाया गया है,जो सरकार के आय-व्यय के अंदर आता है तथा कभी भी इस शिक्षण संस्थान में आय-व्यय का लेखा जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया है। जो इस शिक्षण संस्थान में पूर्व के काल के संचालन में हुई भारी अनियमितता की ओर इशारा करता है, इस शिक्षण संस्थान के निर्वाचित पदाधिकारियों के मनमानेपन तथा अध्यक्ष को रबर स्टाम्प के रूप में रखने का मनोभाव के कारण मैं प्रारम्भ से ही इसमें काफी असहज महसूस कर रही हूँ। शिक्षण संस्थान में निर्वाचित कमिटी की लचर व्यवस्था के कारण ही विश्वविद्यालय द्वारा बी. एड की मान्यता को निलंबित किया गया तथा वर्तमान में श्री तृप्ति प्रसाद सिंह, अध्यक्ष सहजानंद सरस्वती समाज बोकारो के माध्यम से शिक्षक संस्थान का संचालन किया जा रहा है। जो भी नियमित एवं नियमानुकूल नहीं है। वर्तमान कार्यकाल में शिक्षण संस्थान का संचालन पूर्ण रूप से मनमानेपन से कार्यकारी सचिव रमाकांत शर्मा द्वारा किया गया है, मीटिंग तथा अन्य अवसर पर मेरे द्वारा संचालन संबंधित वित्तीय आंकड़ा एवं अन्य का आय व्यय का आंकड़ा बार-बार मांगने पर कभी भी इनके द्वारा मेरे समक्ष कोई भी कागजात या आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया है तथा मुझे यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि शिक्षण संस्थान से संबंधित मेरे नाम से भी पत्राचार एवं और कागजातों का लेखा-जोखा भी इनके द्वारा अपने कब्जा में करके रखा गया है, और अपने ही मोबाइल नंबर एवं ई-मेल को सभी जगह अपडेट करके रखा गया है।
अतः निवेदन है कि निम्नलिखित बिन्दुओं पर जाँच कराकर आवश्यक कार्रवाई करते हुए शिक्षण संस्थान के कमिटी को भंग करते हुए मेरे त्याग पत्र को स्वीकार करने की महती कृपा की जाय।
1. संस्था/न्यास के संपूर्ण कार्यकाल के दौरान किये गये वित्तीय लेन देन, बैंक खातों ऑडिट रिपोर्ट एवं अन्य वित्तीय अभिलेखो की जाँच कराई जाय।
2. महाविद्यालय एवं विद्यालय में विभिन्न वर्षों में हुए नामांकन, विद्यार्थियों की संस्था शुल्क संग्रह तथा संबंधित अभिलेखो की जाँच कराई जाय तथा यदि किसी भी अवधि में अनियमितता हुई तो उसकी जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए रिफंड की कार्रवाई करने की कृपा की जाय।
3. जाँच में संस्था के आय-व्यय, बैंक खाते, ऑडिट, नियुक्तियाँ, नामांकन, शुल्क, मान्यता एवं संबद्धता, विश्वविद्यालय से संबंधित पत्राचार एवं कार्यवाही, प्रबंध समिति की बैठकों एवं निर्णयों तथा पदाधिकारियों द्वारा किए गए प्रशासनिक कार्यों को सम्मिलित किया जाना उचित होगा।
4. साथ ही, सचिव की अनुपस्थिति की अवधि तथा उस दौरान उप-सचिव द्वारा कार्यकारी सचिव के रूप में किए गए कार्यों एवं लिए गए निर्णयों की भी अभिलेखों के आधार पर जाँच की जाए। विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय के निलंबन की परिस्थितियों तथा वर्तमान में सेवा समाज, बोकारो के अध्यक्ष द्वारा किए जा रहे संचालन से संबंधित अभिलेखों एवं निर्णयों को भी जाँच के दायरे में रखा जाना उचित होगा।
5. साथ ही, संस्था के संबंध में मेरे द्वारा पूर्व में प्रस्तुत आवेदन एवं उसमें उठाए गए विषयों को यथावत रखते हुए संस्था के स्थापना काल से वर्तमान तक के सम्पूर्ण कार्यकाल की निष्पक्ष जाँच कराने की कृपा की जाए, ताकि संस्था के वास्तविक तथ्यों एवं कार्यप्रणाली की स्थिति स्पष्ट हो सके।
6. साथ ही संस्था के जाँच की जाती है, तो उसे केवल किसी एक व्यक्ति अथवा किसी एक कार्यकाल तक सीमित न रखते हुए संस्था के स्थापना काल से वर्तमान तक के सम्पूर्ण कार्यकाल को व्यापक जाँच के दायरे में रखा जाए।
महाशय, वर्तमान परिस्थितियों तथा प्रबंध समिति की कार्यप्रणाली से मैं अत्यंत व्यथित हूँ। समिति द्वारा अपने स्तर से जिस प्रकार निर्णय एवं कार्यवाही की जा रही है, उससे अध्यक्ष के रूप में मेरे लिए संस्था के कार्यों का स्वतंत्र एवं प्रभावी ढंग से निर्वहन करना अत्यंत कठिन हो गया है। ऐसी परिस्थिति में पद पर बने रहना संस्था के हित में भी उचित नहीं समझती हूँ।
अतः वर्तमान परिस्थितियों से व्यथित होकर मैं अपने पद के अधिकार का उपयोग करते हुए स्वामी सहजानंद सरस्वती शिक्षण संस्थान, बोकारो के चयनित कमिटी को भंग करती हूँ तथा अध्यक्ष पद से त्याग पत्र प्रस्तुत करती हूँ। कृपया मेरे त्याग-पत्र को स्वीकार करते हुए मुझे अध्यक्ष पद के दायित्व से मुक्त करने की कृपा की जाए। साथ ही उपायुक्त महोदय से सादर आग्रह है कि चुनाव कराकर नई कमिटी बनने तक शिक्षण संस्थान का संचालन प्रशासन की देख-रेख में सुनिश्चित किया जाय।
अतः मेरा विनम्र अनुरोध है कि मेरे द्वारा पूर्व में प्रस्तुत आवेदन एवं उसमें उल्लिखित तथ्यों को भी उक्त जाँच के संदर्भ में सम्मिलित किया जाए, ताकि संस्था के संबंध में पूरी स्थिति एक साथ स्पष्ट हो सके।
अतः श्रीमान से अनुरोध है कि उपर्युक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा की जाय।

भवदीया
(सुषमा देवी) अध्यक्ष, स्वामी सहजानंद सरस्वती शिक्षण संस्थान, बोकारो।
प्रतिलिपि –
1रजिस्ट्रार, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद।
2 अपर समाहर्त्ता, बोकारो।
3. डॉ० टी० पी० सिंह, अध्यक्ष, स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा समाज, बोकारो।
4. प्राचार्य, स्वामी सहजानंद बी. एड. कॉलेज एवं संबंधित विभाग।
5. सभी स्थायी सदस्य, स्वामी सहजानंद सरस्वती शिक्षण संस्थान, बोकारो।
6. प्राचार्य, स्वामी सहजानंद सरस्वती शिक्षण संस्थान, बोकारो आपको निर्देश दिया जाता है कि इस पत्र को सभी संबंधित को प्रेषित करेंगे।

अध्यक्ष का पत्र ही बतलाता है कि मामला कितना संगीन और गंभीर है। वित्तीय अनियमितताओं के साथ साथ यहां अध्ययन करनेवाले विद्याािर्थयों के भविष्य को लेकर भी चिन्ताजनक है। जब संस्थान का अध्यक्ष ही सवाल उठातीं हैं तो मामले को आगे बढने से पहले किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच बेहद जरूरी हो गयी है। इस त्रूाग पत्र के जरिए उठाए गये सवाल ने एक बार फिर स्वामी सहजानंद सरस्वती बी एड कालेज के विवाद को गहरा दिया है और इसकी कार्यशैली को चर्चा मे ंला दिया है। इस बीच विश्वविद्यालय द्वारा इसकी संबद्धता रद्ध किए जाने का मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करने लगा है।

Udan Live
Author: Udan Live

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