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ओएनजीसी ने समुन्द्र मंथकर निकाल डाली अथाह गैस भंडार

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बोकारो। सनातन मान्यता है कि देवतओं ने समुन्द्र मंथा था तो उससे निकाली थी अमृत। और अब ओएनजीसी ने मंथकर सुमुन्द्र निाकल ली है गैस भंडार। ओएनजीसी ने डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम और भारत के घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को बढ़ाने के प्रयासों को मजबूत करने के मकसद से समुन्द्र मंथन किया और गैस का अथाह भंडार ढूंढ निकाला। गैस की प्रवाह और भंडारण प्रेशर से ओएनजीसी की खोजी टीम बेहद उत्सहित है और उसकी इस खोज से गैस के मामले में भारत को बड़ी सफलता मिली है। इस खोज से उत्साहित ओएनजीसी की टीम को उम्मीद है कि अपने देश में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का आधार बढ़ाने का प्रयास कामयाब हो सकेगा। ओएनजीसी ने समुद्र मंथन पहल के तहत ओडिशा तट के पास महानदी अपतटीय बेसिन में एक गहरे समुद्र के कुएं में एम एन-डीडब्लू 18-1-एच-डी में बड़े गैस भंडार की खोज की है। करीब करीब 1623 मीटर की गहराई तक खोदे गए इस कुएं में 1,441 से 1,452 मीटर के स्तर पर ही गैस पूरी प्रवाह से मिली है। भाजपा के नेता व राज्त्य सभा सदस्य प्रदीप वर्मा ने इस खेाज पर प्रसन्न्ता जाहिर की है। उन्होंने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता के साथ कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं समर्थ नेतृत्व में भारत निरंतर आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह भविष्य के भारत की झलक है। यह नए भारत के सामर्थ्य का प्रमाण है। यह विश्व पटल पर उभरते आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का परिचायक है। यह भारत के नए सफर और नए संकल्पों को परिभाषित करता दृश्य है। उनकी मानें तो यह उपलब्धि भारत के डीपवॉटर अन्वेषण, स्वदेशी ऊर्जा संसाधनों के विस्तार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सोषल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है और कहा है कि यह बतलाता है कि ऊर्जा सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक, नया भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है।
ओडिशा तट के महानदी ऑफशोर बेसिन के डीपवॉटर क्षेत्र में खोदा गया यह कुंआ कोणार्क से करीब 45 किलोमीटर दूर कुआं ‘समुद्र मंथन’ अभियान का पहला कुआं है। इस कुएं की गैस के प्रवाह से ओएनजीसी को उत्साह से भर दिया है। आंड़िसा तट के बेहद निकट होने के कारण शोध व अन्य अन्वेषण के काम के बाद यहां से गैस का प्रोडक्शन जल्द शुरू होने के आसार दिख रहे हैं।
इस खोज के अलावा आसपास के क्षेत्रों में पीएनजी के नियमों के तहत साझा सुविधाओं के जरिए विकसित करने की संभावना है जतायी गयी है। इससे गहरे समुद्र में मौजूद गैस की तलाश करने व उनको वहो से निकालने का काम बढ़ सकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा की लिहाज से यह हर भारतीय को उत्सह से भरनेवाली खबर है। भारत की ऊर्जा ताकत अब और बढेगी। तीन महीन के प्रयास के बाद ओएनजीसी को गैस खोजने में यह सफलता मिली है। इसकी ड्रिलिंग 25 जुलाई 2026 को केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी क्रे प्रयास से शुरू हुई थी। इस सफलता ने भारत में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का आधार बढ़ाने की कोशिशों को प्रोत्साहित किया है।

Udan Live
Author: Udan Live

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