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आसमान छूने को आतुर स्टील कीमत, 75,000 रुपये प्रति टन पार
सोने चांदी आसमान छू रहे हैं तो स्टील उद्योग भी बूम पर
अजय अश्क
बोकारो। सोने चांदी आसमान छू रहे हैं तो स्टील उद्योग भी बूम पर है। इस्पात की कीमत बढ़कर आसमान छूने लगी है और पिछले चार साल में सबसे अधिक दर पर स्टील का भाव पहुंच गया है। इसकी कीमत अब बाजार में 75 हजार को पार करने की तैयारी में है।
रा मेटेरियल यानि कच्चे माल दाम बड़ने से लगात कॉस्ट बढ़ने लगी है और मार्केट की स्पर्द्धा में मजबूती ेस टिके रहने के लिए इसकी कीमत को बढ़ाना एक मजबूरी भी है। मतलब इब सोना चांदी ही नहीे चमक रही। बल्कि इस्पात ने भी अपनी चमक बता दी है। मार्केट में अपनी औकात दिखा दी है। अब बाजार की मांग भी तेज हुई है। मानसून के बाद मांग बढ़ने की वजह से देश में स्टील की कीमतें 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। मार्केट रिसर्च से जुड़ी एजेसी ने माना है कि यह तेजी इस्पात उत्पदन के लिए जरूरी कच्चे माल, खासकर कोकिंग कोल महंगा होने की वजह से स्टील की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाजार की तेंजी का यह आलम है कि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें 64,000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड कॉइल की कीमतें चढ़कर 75,000 रुपये प्रति टन तक आ गयीं है। ये दोनों प्रोडक्ट जून 2022 में इसी तरह की तेजी से देखे गये थे। इस साल अगस्त में हॉट रोल्ड क्वायल की कीमतों में 6000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड क्वायलों की कीमतों में 8500 रुपये प्रति टन की तेजी आई थी। इसकी वजह से हॉट रोल्ड उत्पाद की कीमतें 58,000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड उत्पादों की कीमतें 66,500 रुपये प्रति टन थीं। लेकिन इस अवधि में कोकिंग कोल में वृद्धि हुई प्रतिटन 65 डालर की और इस्पात की उत्पादन लागत बढ़ गयी। एक तरफ कच्चे माल कोयले के साथ साथ लौह अयस्क की लागत बढ़ी और दूसरी ओर मांग में तेजी ने इस्पात की कीमत को उछाल दी है। इस्पात की इस तेजी के जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद भी नहीं बनती है। जानकार बताते हैं कि कोकिंग कोल ने इस्पात को उछाला है।ब्लास्ट फर्नेस रूट से स्टील उत्पादन की लागत में सिर्फ कोकिंग कोल की 30 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है।
