
बोकारो। लोकतंत्र और संविधान को दरकिनार कर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा सरकार के प्रभाव में आकर लिए जा रहे फैसला का सच सामने आ गया है। उनका चेहरा बेनकाब हो गया है। और लोकतंत्र के हत्यारे अपहर्त्ता के लिए इस देश में कोई जगह नहीं है। इसे फांसी दी जानी चाहिए।ऐसा आरोप लगाकर मुचय चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पंुतले को राजद ने बिरसा चौके के समीपफांसी पर लटका दिया। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के साथ ही विरोधी दल अब सडक् पर उतर कर उबलने लगे हैं। उनके खिलाफ पूरे देश में आक्रोश का माहौल बनने लगा है और विरोधी दल के नेता और कार्यकर्त्ता सड़क पर लगातार उतर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को लोकतंत्र का हत्यारा बताते हुए तत्काल मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से उनकी बर्खास्तगी की मांग की जाने लगी है। उनके खिलाफ लोकतंत्र का अपहरण व हत्या करने का आोरप लगाते हुए एफआई आर दर्ज करने की मांग भी जोर पकड ़ने लगी है। भारत के चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की असलियत आयोग के ही दो अन्य सदस्यों द्वारा खोले जाने के बाद अब ज्ञानेश कुमार का चाल चरित्र चेहरा बेनकाब हो चुका है औश्र अब उनका इस पद पर रहना लोकतंत्र के लिए बिलकुल ही खतरनाक है। विरोधी दल इन्हें निशाने पर लेकर उनके खिलाफ सड़क पर उतरते हुए ऐसी ही मांग कर रहे हैं ताकि लेाकतंत्र के हत्यारे के हाथ से लोकतंत्र को बचाया जा सके। चुनाव आयोग जैसी लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा उसकी साख बचायी जा सके। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रोश से भरे लोग अब इसकी जांच की मांग भी कर रहे हैं कि 2014 के बाद उनके परिवार के तमाम लोग यूपीएससी परीक्षा को किस तरीके से क्रैक किए और किस तरीके से उन्हें आईएएस,आईपीएस और आईआरएस की नौकरी मिली। ज्ञानेश कुमार की करतूत उजागर होने के बाद उन्हें बर्खास्त करने की मांग भी देश के राष्ट्रपति से की जा रही है। आरोप यह भी लगाए जाने लगा है कि मोदी भक्ति,अंधभक्ति और सरकार के पक्ष में फैसला लेकर लोकतंत्र का गला घोटने वाले ज्ञानेश कुमार ने अपनी करतूतों की वजह से सरकार से काफी इनाम पाया है, जिसकी जांच अब स्वतंत्र एजेसियों से करायी जानी चाहिए। यह जांच आज के समय में जरूरी हो गई है क्योंकि यह मामला किसी ज्ञानेश कुमार नामक मुख्य चुनाव आयुक्त का नहीं है।यह मामला देश के लोकतंत्र का है,देश के संविधान का है और देश की आत्मा का है, जिसकी हत्या की गई है। राष्ट्रव्यापी ज्ञानेश विरोधी अभियान के तहत झारखंड में भी अभियान ने तेजी पकड़ ली है और विभिन्न दल के लोग सड़क पर उतरने लगे हैं। प्रदेश व्यापी कार्यक्रम के तहत बोकारो में राजद ने ज्ञानेश कुमार को लोकतंत्र का हत्यारा घोषित किया,फांसी पर लटकाया और फिर नया मोड़ में पुतले का दाह संस्कार कर लोकतंत्र के कथित हत्यारा ज्ञानेश कुमार को निपटा दिया। बोकारो जिला राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बुद्ध नारायण यादव के नेतृत्व में रैली निकाली गई। नया मोड़ में एक पेड़ से फांसी का फंदा लटका कर मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतले को फांसी पर लटकाया गया और फिर आग लगाकर खाक कर दिया गया। इस कार्यक्रम में विशेष तौर से राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता और श्रमिक नेता घनश्याम चौधरी भी मौजूद थे। प्रदेश प्रवक्ता ने ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। राष्ट्रपति से मांग की गई कि उन्हें तत्काल बर्खास्त करें।
बोकारो जिला अध्यक्ष बुद्ध नारायण यादव ने कहां की मुख्य चुनाव आयुक्त की हकीकत सामने आ गई है और अब सांच को आंच क्या? उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के जरिए मोदी जी की भी हकीकत सामने आ गई है कि किस तरीके से मुख्य चुनाव आयुक्त को जरिया बनाकर मोदी जी ने लोकतंत्र का गला घांेटा,जनादेश का अपहरण किया और जबरन सत्ता पर कब्जा जमाया। अपने अंगूठे अंदाज में मुख्य चुनाव आयुक्त को आंदोलनकारियों ने निपटाया। राजद के युवा नेता जितेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि लोकतंत्र के हत्यारों और संविधान का गला घोंटने वालों के लिए भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कोई जगह नहीं है, उसके लिए जो सजा मिलनी चाहिए वह फांसी ही हो सकती है। ऐसी मांग करते हुए आंदोलनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के पुतले को फांसी पर लटका दिया। विरोधी कहते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त जिनके जिम्में लोकतंत्र की रक्षा और संविधान की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होती है, वह ऐसा निकलेगा इसकी आशंका पहले से ही थी। इसी कारण लगातार विरोधी दल के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठा रहे थे। लेकिन इसे राजनीति समझा जा रहा था। पर अब जब चुनाव आयोग के बीच के ही दो सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर जो सवाल उठाए हैं उसने लोकतंत्र की जड़े दिला दी है और इसके बाद तो भूचाल ही मच गया है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोग सड़क पर उतरने लगे हैं, उसे अकारण नहीं कहा जा सकता।
