

अजय अश्क
बोकारो। गांव के चौराहे की दुकान ने आज इतिहास ही रच दिया। वहां बन रहे आलू चॉप और पकौड़ी की सोंधी खुशबू ने आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अपने यहां खींच लिया। मामला कसमार का है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पकौड़ी खाने की इच्छा हुई। उनका लाव लश्कर तैयार हुआ। साथ में अपनी धर्मपत्नी कल्पना सोरेन को भी लिया और निकल पड़े पूरे लाव लश्कर लिए अपने गांव नेमरा से कसमार के लिए। बिल्कुल सादगी वाला ड्रेस, पत्नी कल्पना सोरेन भी साधारण साड़ी में। ना कोई तामझाम और ना ही दिखावा। एक साधारण सेे वेश में झारखंड का दिखा यह असाधारण परिवार। मुख्यमंत्री का काफिला कसमार-बरलांगा निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण करता हुआ आगे बढ़ता गया और पहुंच गया सुबह सबेरे कसमार चौक पर। वहीं पर मुख्यमंत्री का काफिला रूका और मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ चले गये कुनाल की दुकान में। तब वहां छानी जा रही थी गरमागरम पकौड़ी। सीएम का आना इस सहजता से हुआ कि किसी को पता नहीं चला कि मुख्यमंत्री अचानक से आने वाले हैं या ऐसे अचानक से आ जाएंगे। अचानक से मुख्यमंत्री को देखकर लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आए और कसमार चौक के इस साधारण झोपड़ीनुमा पकौड़ी की दुकान में घुसकर चूल्हे के पास रखी हुई कुर्सी पर जा जमें। उनकी पत्नी भी उनके संग आ गयी संभवतः बैठने के लिए होटल में उनको कोई जुगाड़ नसीब नहीे हुआ और वह खड़ी खडी ही गरमागरम पकौडी का आनंद उठाने लगीं। ना कोई तामझाम दिखा और ना ही कोई दिखावा। दुकानदार पकौड़ी तलता रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व उनकी पत्नी और अन्य लोग पकौड़ी चखते रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों से बात की,उनकी समस्याएं सुनी और क्या कुछ किया जा सकता है उसके लिए उनसे राय ली। दरअसल पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं और यहीं से पारिवारिक कार्यक्रम के साथ-साथ सरकारी काम को भी निपटा रहे हैं। अपनी मां रूपी सोरेन के निधन के बाद उनके दाह संस्कार से लेकर अंतिम संस्कार के विधि विधान करने के लिए मुख्यमंत्री पिछले कई दिनांे अपने पैतृक गांव में ही हैं। उनकी दिवंगत माता का विधि विधान से अंतिम संस्कार कल ही संपन्न हुआ और मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम को विधि विधान से निपटा कर आज कसमार के कुणाल जयसवाल की दुकान पर पकौड़ी का आनंद लेने के लिए चले आए। हां इस दौरान उन्होंने कसमार से बरलंगा के बीच बन रही उस सड़क का निरीक्षण भी किया,जो उनके गांव पेमरा से होकर आगे गुजरेगी। इसी क्रम में वे आगे बढ़ते गये और कसमार चौक के पास सड़क के किनारे की इस झोपड़ीनुमा दुकान में बन रही पकौड़ी की सोंधी खुशबू नेे मुख्यमंत्री को अपनी दुकान पर सहज तरीके से खींच लिया। अपनी इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री बिल्कुल सहज सरल तरीके से नजर आए और उनके इस व्यवहार और तौर तरीकों को देखकर दिवंगत शिबू सूरन की याद लोगों को बरबस ही आ गयी। दिशम गुरू शिबू सोरेन भी इसी तरह सहज सरल तरीके से कहीं भी रुकते थे, लोगों के बीच घुस जाते थे। उनसे मिलते थे और चाय पकौड़ी करते हुए आगे जाते थे। ना कोई तामझाम और ना कोई वीआईपी ट्रीटमेंट की जरूरत थी उनको। बल्कि सादगी से आमलोगों से जुड़ना शिबू सोरेन की अपनी शैली रही थी, खासियत रही थी और कुछ इसी तरह की शैली आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन में भी दिखी। अपने पिता की ही तरह सहज सरल तरीके से आम लोगों के बीच हेमंत सोरेन पहुंच गए, पकौड़ी खाना तो एक बहाना था। इसी बहाने उनकी समस्याएं सुनी और फिर पकौड़ी के स्वाद का आनंद लिया, कुछ खाया कुछ ठोंगे में लपेटवाया और फिर अपने काफिले के साथ निकल गए लोगों का अभिवादन करते और लोगों की बात सुनते हुए। यह भरोसा देते गए की काम होगा विकास होगा और राज्य का कायाकल्प होगा। हां,इस दौरान कई कैमरे पहुंच गए,दनादन कमरे में कैद हुई मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी की गतिविधियां। इस तरीके से अपने सादगी की अपनी पहचान छोड़कर अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ मुख्यमंत्री वापस लौट गए। मुख्यमंत्री ने टी शर्ट पहन रखा था कंधे पर हरे रंग की एक तौलिया लटका रखी थी और उनकी पत्नी साधारण सी साड़ी पहन कर साथ साथ चल रही थी। मुख्यमंत्री का इस तरह आना चर्चा मंे रहा तो चाय पकौड़ी बेचनेवाले कुणाल की झोपड़ीनुका दुकान भी आज चर्चा मंे आ गयी। कुणाल तो इस बात को लेकर रोमांचित है कि मुख्यमंत्री के आने से उसकी झोपड़ी के भाग्य आज जग गये। 

