सेल की 54वीं एजीएम में सीएमडी ने कंपनी के प्रदर्शन और भावी रणनीति को बताया
नई दिल्ली। बाजार के उतार-चढ़ाव से बने चुनौतीपूर्ण वैश्विक इस्पात माहौल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने विश्व स्तर पर इस्पात मांग की वृद्धि का नेतृत्व करना जारी रखा और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते प्रमुख इस्पात उत्पादक के रूप में अपना स्थान बनाया है। यह कहना है भारतीय इस्पात प्राधिकरण सेल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक ए के पंडा का। उनकी मानें तो सेल ने तकनीकी उन्नयन, वित्तीय विवेक, डिजिटलीकरण, मानव संसाधन पहलों और स्थिरता के प्रयासों से नए मानदंड स्थापित करते हुए मजबूत सुदृढ़ और अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया है और वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ बनायी है।

भारतीय इस्पात प्राधिकरण सेल के सीएमडी डॉ. ए के पंडा सेल की 54 वीं वार्षिक आम सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने एजीएम में कहा कि वैल्यू ऐडेड स्टील में हुई भारी बढ़ोत्तरी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मेजर उत्पाद आपूर्ति पर सेल की ओर से ज़ोर दिया गया। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सीएसओआई, नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड में अपनी 54वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) आयोजित की गई थी। अंशधारकों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. ए. के. पंडा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के प्रदर्शन की जानकारी दी और आगामी वर्षों के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
डॉ. पंडा ने इस बात पर जोर दिया कि, ष्वर्ष के दौरान सेल ने न केवल क्रूड स्टील, फिनिश्ड स्टील और सेलेबल स्टील के अब तक के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन किया, बल्कि वैल्यू क्रिएशन पर भी विशेष ध्यान दिया। कंपनी ने 10.7 मिलियन टन वैल्यू-ऐडेड स्टील का उत्पादन किया, जो कुल सेलेबल स्टील का 56 फीसदी था। यह वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में सात फीसदी ज्यादा है। उन्होंने कंपनी के प्रदर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, ऑटोमोटिव, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में 28 नए उत्पाद पेश किए गए, जिसने उभरती राष्ट्रीय और क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करने की सेल की क्षमता को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि इस उन्नत उत्पाद क्षमता ने राष्ट्र निर्माण में सेल की भूमिका को सीधे तौर पर सुदृढ़ किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में, कंपनी ने स्वदेशी रूप से विकसित वंदे भारत पहियों की पहली खेप रवाना की और वर्ष के दौरान नौसेना में शामिल किए गए पांच भारतीय नौसेना जहाजों – आईएनएस अर्नाला, उदयगिरि, हिमगिरि, एंड्रोथ और अंजदीप के लिए इस्पात की आपूर्ति की। डॉ. पंडा ने राष्ट्रीय इस्पात नीति के अनुरूप विकसित भारत 2047 में योगदान देने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दोहराया। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पंडा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में सेल ने ₹1,09,000 करोड़ से अधिक का अपना अब तक का सर्वाेच्च कारोबार दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8 फीसदी अधिक है। विवेकपूर्ण फंड प्रबंधन के जरिये उधारी में ₹5,000 करोड़ से अधिक की कमी की गई। उच्चतर विक्रय मात्रा, इन्वेंट्री में कमी और घटे हुए कर्ज के साथ, कंपनी की लाभप्रदता मजबूत हुई, और पीबीटी (कर पूर्व लाभ) एवं पीएटी (कर पश्चात लाभ) में क्रमशः 44 फीसदी और 50.5फीसदी का सुधार हुआ। बोर्ड ने ₹2.35 प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम लाभांश (फाइनल डिविडेंड) की सिफारिश की है।
कंपनी के सस्टेनेबिलिटी को रेखांकित करते हुए सीएमडी ने साझा किया कि सेल ने इस्को स्टील प्लांट में स्थापित पहले 4 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर प्लांट से 5.61 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा (ग्रीन पावर) उत्पन्न की, जबकि भिलाई स्टील प्लांट में 20 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट निर्माणाधीन है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न संयंत्रों में 278.5 मेगावाट की सौर परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है। भविष्य की योजनाओं के बारे में डॉ. पंडा ने कहा, सेल की योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक क्रूड स्टील क्षमता को बढ़ाकर ्35 मिलियन टन प्रति वर्ष करने पर केंद्रित है। इसे हरित क्षमता निर्माण, कम कार्बन वाली तकनीकों को अपनाने, डिजिटल सक्षमता, उन्नत ग्राहक जुड़ाव, वैल्यू-ऐडेड और स्पेशल स्टील की हिस्सेदारी बढ़ाने, तथा खुदरा (रिटेल) और एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र के साथ गहरे एकीकरण द्वारा समर्थन दिया जाएगा।
