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निराशा के दौर से उबरेगा नगर निगम, वापस लौटेंगे नगर निगम के दिन, डिप्टी मेयर को भरोसा


उड़ान न्यूज ब्यूरो
बोकारो। चास नगर निगम में कार्य संस्कृति समाप्त हो गयी है। अधिकारी व कर्मचारी काम करने की बजाय एसी में रहते हुए आराम तलबी हो गये हैं। नाकारात्मक हो गये हैं और काम करने की बजाय टालने की प्रवृति के साथ साथ लोगों को बरगलाने में लगे हुए हैं। फिर भी उत्साह कायम है। काम करने की बजाय आराम तलबी हो गये,ऐसे लोगों को दुरूस्त किया जायेगा और कार्य संस्कृति को बेहतर बनाकर नगर निगम को पटरी पर लाया जायेगा। यह कहना है चास नगर निगम की उप महापौर का। चास नगर निगम की उप महापौर पूजा कुमारी ने कहा कि बहुत ही उत्साह से चुनाव लडकर फिर जीत कर इस कुर्सी पर आयीं थीं , मन में बहुत कुछ करने कीं इच्छा लेकर लेकिन यहा ंआने के बाद निराशा का माहौल मिला। बहुत कुछ नया करने की इच्छा थी। लेकिन नगर निगम में फंड का अभाव और सरकार से फंड का नहीं मिलना सेवा की भावना आहत कर गया है। भारत सरकार और राज्य सरकार के बीच में समन्वय का अभाव और रायल्टी के विवाद ने शायद नगर निगम को मिलनेवाले फंड को लटका दिया है। मतलब फंड के मामले मंे चास नगर निगम ठनठनपाल तो फिर सवाल कैसे हो विकास। लोगों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं कैसे सुलभ करायी जाय। जनता की सेवा कैसे हो। और जब सेवा नहीं तो फिर किस आधार पर उनसे होल्डिंग की वसूली हो। आज हालात ऐसे हैं कि ना तो कायदे से वार्डो की सफाई हो पा रही है और ना ही लोगों को पीने का पानी दे पाने में नगर निगम कायमाब हो पा रहा है। चास नगर निगम की उप महापौर पूजा कुमारी ने एक्सक्ूलसिव इंटरव्यू में बहुत कुछ कहा। जिसमें लाचारगी भी दिखी, काम करने की ललक भी और कर्मचारियों व अधिकारियों की स्वच्छंदता, काम न करने की प्रवृति और फील्ड में जाकर काम करने की बजाय एसी मंे बैठकर आरामतलबी पर गुस्सा भी। फिर एक आत्मविश्वास भी सब कुछ बदलेगा। सब चीजें पटरी पर आयेंगी। चास नगर निगम फिर से अपने काम के बलबूते लहरायेगा अपनी कामयाबी का परचम। फिर से झारखंड में चास नगर निगम का काम बोलेगा और झारखंड में चास नगर निगम की अपनी अलग धाक बनेगी, पहचान बनेगी। चास नगर निगम की उप महापौर पूजा कुमारी से एक्सक्ूलसिव बातचीत ।
खत्म हो गयी है कार्यसंस्कृति – उपमहापौर ने कहा कि नगर निगम में कार्यसंस्कृति खत्म हो चुकी है। नकारात्मकता बढ़ गयी है। काम करने की बजाय कर्मचारी अधिाकरी एसी कमरे में आराम फरमाने की लत लगा चुके हैं और रोड पर उतर कर काम करने की उनके अंदर इच्छा शक्ति नहीं रह गयी है। वे लंबे समय तक स्वतंत्र रहकर बिलकुल स्वतंत्र हो गये हैं और अपने विचारो के मालिक बन गये हैं। अब जब उनको जन प्रंतिनिधियों ने काम करने के लिए दवाब बढ़ा दिया है तो वे लोगांे को गुमराह करने में लगे हैं। लेकिन ऐसे लोगो की स्वच्छंता नहीं चलने दी जायेगी। उन्हें एसी की आरामतलबी से बाहर निकल कर, सड़क पर उतरना ही होगा और अपनी जिम्मेवारी का वहन करना ही होगा। नगर निगम की निवार्चित बॉडी पूरी शक्ति से नगर निगम की बिगड़ी कार्यसंस्कृति बनाने व काम को पटरी पर लाने के प्रयास में लगी हुई है और नगर निगम में बदलाव लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी।
फंड ठनठनपाल- नगर निगम का काम फंड नहीं मिलने के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों को बुनियादी साफ सफाई की सुविधा भी पूरी तरह से दे पाने में परेशानी हो रही है। जहां वार्डों की सफाई के लिए आठ दस मजदूर चाहिए,वहां केवल तीन चार को ही काम पर लगाया जा रहा है। जब जनता की सेवा ही नहीं हो पायेगी तो उनसे टैक्स मिलने की उम्मीद भी नहीं रह जाती। केन्द्र व राज्य सरकार के बीच आपस का तालमेल या रॉयल्टी के पचड़े ने नगर निगम को मिलनेवाले फंड की राह मे ंरोड़ा लटका रखा है। उप महापौर ने स्वीकार किया कि ुंड के अभाव में नगर निगम का सेवा व विकास का काम प्रभावित हो रहा है। और कुछ सेवा का नया काम करने की इच्छा दबी रह जा रही है। पेयजल की चर्चा करते हुए उप महापौर पूजा ने कहा कि जुस्कों ने पहले फेज के काम को अपने हाथ में लेने के लिए चालीस करोड़ मांगें हैं और निगम के पास उसे देने के लिए यह राशि नहीं है। निगम के पास केवल बीस करोड़ ही है और फंड जेनरेट करने का और कोई उपाय भी नहीं है। इस हाल में जुस्को ने जो चालीस करोड़ मांगे है उसे दे पाना संभव नहीं हो पा रहा। अगर बीस करोड़़ जो निगम का है उसे दे दिया जाए तो 35 वार्ड का काम ही ठप्प पड़ जाए। डिप्टी मेयर का सरकार से निवेदन भी कि वह फंड सुलभ कराए ताकि जनता की अपेक्षाएं पूरी की जा सकें।
निराशा का दौर खत्म होगा- फिलहाल नगर निगम का काम जिस गित से होना चाहिए वह कई कारणों से नहीं हो पा रहा। लेकिन उप महा पौर को उम्मदी है कि चीजें पटरी पर आयेंगी। नगर निगम अपने पुराने लय में वापस लौटेगा और सब कुछ अच्छा होगा। यह कहना कि नगर निगम फिलहाल निगम होने का अपना हक खो चुका है ठीक नहीं होगा। नगर निगम के दिन वापस लौटेंगे और चास नगर निगम फिर से अपनी पहचान से झारखंड में कपनी कामयाबी का परचम लहरायेगा। पूजा कुमारी को बेहद उम्मीद है। सेवा की ललक भी और भविष्य पर भरोसा भी।

Udan Live
Author: Udan Live

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